8 अप्रैल, 2026 को अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ नाजुक युद्धविराम अब दम तोड़ता नजर आ रहा है। संधि के 50 दिन बाद भी शांति की उम्मीदें कूटनीतिक चक्रव्यूह में फंसी हुई हैं। जहां कतर में पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है, वहीं वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी का युद्ध छिड़ चुका है। इस महा-गतिरोध के पीछे छिपे हैं वे 5 विवाद, जो दुनिया को बड़े संकट की ओर धकेल रहे हैं।
परमाणु संवर्धन इस जंग का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को परमाणु धूल करार दिया है। ट्रंप चाहते हैं कि इसे ईरान के भीतर ही सख्त निगरानी में नष्ट कर दिया जाए। तेहरान ने इसे अपनी रेड लाइन बताते हुए कहा है कि संवर्धन उनका अविभाज्य अधिकार है, जिसे वे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
ईरान और ओमान के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन और टोल वसूली को लेकर खबरें सामने आई हैं। व्हाइट हाउस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि किसी भी देश को इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह विवाद किसी भी क्षण सैन्य संघर्ष में तब्दील हो सकता है।
ईरान ने शर्त रखी है कि बातचीत आगे बढ़ाने के लिए उसकी फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति तुरंत रिलीज की जाए। ट्रंप ने इस पर दोटूक रुख अपनाते हुए कहा है कि पैसा तभी मिलेगा जब ईरान का व्यवहार बदलेगा। फिलहाल, ट्रंप ने इस तिजोरी की चाबी मजबूती से अपनी जेब में रखी हुई है।
ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तेल निर्यात और वित्तीय लेनदेन पर लगे प्रतिबंधों को हटाना चाहता है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतिम समझौते से पहले कोई आर्थिक राहत नहीं दी जाएगी। ट्रंप का स्पष्ट संदेश है: जब तक सब कुछ तय नहीं हो जाता, प्रतिबंधों का शिकंजा नहीं ढीला होगा।
सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब ट्रंप ने ईरान डील को अब्राहम समझौते से जोड़ दिया। ट्रंप ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र समेत कई देशों से कहा है कि यदि वे इज़रायल को मान्यता नहीं देते, तो वे ईरान डील से पीछे हट जाएंगे।
इस जिद ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पाकिस्तान ने इस विचार को सार्वजनिक रूप से नकार दिया है, और सऊदी अरब ने भी साफ कर दिया है कि स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र के बिना इज़रायल को मान्यता देना नामुमकिन है। यह गतिरोध अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े वैश्विक संकट का रूप ले चुका है।
#Watch: US President Donald Trump says, “If Saudi Arabia, Qatar, Pakistan, Türkiye, Egypt and Jordan do not sign on to the Abraham Accords, we’re not going to move forward with an Iran deal. Those countries owe it to us.”
— News Edition (@NewsEdition_1) May 28, 2026
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