चीन की बेरुखी के बाद भारत की ओर मुड़े ट्रंप: क्या यह कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक है?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अचानक भारत के प्रति बढ़ा प्रेम चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सबसे अच्छा दोस्त करार दिया है। जानकार इसे एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं, जिसका सीधा संबंध चीन के साथ बिगड़ते संबंधों से है।

चीन यात्रा में ट्रंप को मिला अपमान ट्रंप की यह बदली हुई प्राथमिकता अचानक नहीं है। हाल ही में अपनी चीन यात्रा के दौरान ट्रंप को उम्मीद थी कि वह शी जिनपिंग के साथ बड़े व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे और ईरान जैसे मुद्दों पर चीन का समर्थन पाएंगे। लेकिन वहां उन्हें निराशा हाथ लगी।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर ट्रंप को दो टूक लहजे में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी। बैठक में चीन ने कई शर्तें थोप दीं, जिससे ट्रंप बेहद नाराज हुए। अविश्वास की पराकाष्ठा तो तब देखी गई जब यात्रा के अंत में अमेरिकी दल ने चीन से मिले सभी उपहारों को एयरपोर्ट के कूड़ेदान में फेंक दिया और खाली हाथ लौट आए।

भारत में बढ़ रही अमेरिकी हलचल चीन से मिली कड़वाहट के बाद अब अमेरिका अपना रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो पिछले चार दिनों से भारत में डेरा डाले हुए हैं। वे लगातार एक बड़ी ट्रेड डील की ओर इशारा कर रहे हैं।

रविवार रात एक उच्च-स्तरीय बैठक में रुबियो ने ट्रंप को ऑनलाइन जोड़ा, जहां ट्रंप ने भारत पर भरोसा जताते हुए इसे पुराना और विश्वसनीय साथी बताया। साफ है कि चीन की तुलना में अमेरिका अब भारत के साथ साझेदारी को कहीं अधिक सहज और सुरक्षित मान रहा है।

क्या बोले मार्को रुबियो? अपनी यात्रा के दौरान जब रुबियो से चीन और भारत के बीच तुलना करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कहा, भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला लोकतांत्रिक देश है और अमेरिका का एक मजबूत रणनीतिक सहयोगी है।

रुबियो ने स्वीकार किया कि हालांकि अमेरिका को चीन और भारत दोनों के साथ संबंध बनाए रखने हैं, लेकिन फिलहाल भारत के साथ गठबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण देश है और अमेरिका के लिए भारत से सीखना और आगे बढ़ना समय की मांग है।

अमेरिका की नई रणनीति भारत के पास मौजूद विशाल बाजार और लोकतांत्रिक ढांचा ट्रंप के लिए चीन का सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभरा है। ट्रंप का झुकाव केवल दोस्ती नहीं, बल्कि चीन के खिलाफ खड़ा होने की एक कूटनीतिक तैयारी है। आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली व्यापारिक डील यह तय करेगी कि एशिया के बदलते शक्ति संतुलन में अमेरिका किस हद तक भारत पर दांव लगाता है।

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