ऐसी महिला की तलाश है ... एक पत्र जिसने राजकुमारी को ताउम्र कुंवारा रखा और एम्स जैसा तोहफा दिया
News Image

नई दिल्ली: 27 मई, 1957 की वह भीषण गर्मी, जब राजकुमारी अमृत कौर ने नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की गवर्निंग बॉडी की पहली बैठक की अध्यक्षता की। आज एम्स जिसे देश की स्वास्थ्य प्रणाली का लाइफलाइन माना जाता है, उसे खड़ा करने के पीछे एक राजकुमारी का वह संकल्प था, जिसने उन्हें कभी घर नहीं बसाने दिया।

गांधीजी का वह पत्र और एक अटूट रिश्ता 1936 में महात्मा गांधी ने महिलाओं को आजादी के आंदोलन से जोड़ने के लिए राजकुमारी अमृत कौर को एक ऐतिहासिक पत्र लिखा था। गांधीजी ने लिखा, मैं एक ऐसी महिला की तलाश में हूं जो अपने मिशन को साकार कर सके। क्या आप वह बनेंगी? राजकुमारी ने न केवल इस चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि देश सेवा के लिए आजीवन विवाह न करने का कठिन निर्णय लिया। वे 17 वर्षों तक गांधीजी की सचिव रहीं।

शाही परिवार से आजादी के मैदान तक 2 फरवरी, 1887 को कपूरथला के शाही परिवार में जन्मीं अमृत कौर का बचपन बेहद संपन्न था। उनके पिता राजा हरनाम सिंह ने ईसाई धर्म अपना लिया था। वे पढ़ाई में अव्वल रहीं, ऑक्सफोर्ड से स्नातक किया और क्रिकेट, हॉकी जैसी खेलों में कप्तानी संभाली। हालांकि, स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए उन्हें अपने पिता के निधन (1930) तक इंतजार करना पड़ा।

कुरीतियों के खिलाफ बुलंद आवाज गांधीजी से औपचारिक रूप से जुड़ने से पहले ही अमृत कौर ने पर्दा प्रथा, बाल विवाह और देवदासी जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। 1927 में उन्होंने अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की स्थापना में अहम भूमिका निभाई, जो आज भी महिला सशक्तिकरण का बड़ा नाम है।

गांधीजी के विद्रोही और भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री गांधीजी उन्हें प्यार से विद्रोही कहकर बुलाते थे। आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में वे भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनीं। 10 वर्षों के अपने कार्यकाल में उन्होंने एम्स की नींव रखी। 4 अप्रैल 1952 को आधारशिला रखे जाने के बाद 1956 में संसद के अधिनियम के जरिए एम्स एक स्वायत्त संस्थान बना।

एक महान विदाई राजकुमारी अमृत कौर का निधन 6 फरवरी, 1964 को 75 वर्ष की आयु में हुआ। ईसाई धर्म से ताल्लुक रखने के बावजूद, उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार दिल्ली में यमुना नदी के तट पर सिख रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार किया गया। देश को एम्स जैसी संस्था देने वाली यह विद्रोही आज भी करोड़ों मरीजों के लिए एक मसीहा से कम नहीं है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट का बड़ा दांव: कोच शेली निट्स्के का कार्यकाल 2029 तक बढ़ा

Story 1

CUET UG 2026: 28 मई की परीक्षा स्थगित, बकरीद की छुट्टी में बदलाव के कारण लिया गया फैसला

Story 1

IPL 2026 प्लेऑफ का महासंग्राम: आरसीबी बनाम जीटी की टक्कर, जानें पूरा शेड्यूल और वेन्यू

Story 1

गर्मी की छुट्टियां: सीएम योगी का बच्चों के नाम खास संदेश, मोबाइल छोड़ इन कामों में लगाएं मन

Story 1

खस्ताहाल खजाना और ममता की फेसबुकिया राजनीति: दिलीप घोष का तीखा प्रहार

Story 1

रेलवे क्रॉसिंग पर कुछ सेकंड की जल्दबाजी पड़ गई भारी, ट्रेन और ट्रक की भीषण टक्कर का वीडियो वायरल

Story 1

सड़क पर गुंडागर्दी का बुरा अंजाम: जेसीबी ने पल भर में निकाली बाइक सवार की हेकड़ी

Story 1

तुर्की में लोकतंत्र पर प्रहार: विपक्ष के मुख्यालय में दंगा पुलिस का धावा, अध्यक्ष को जबरन निकाला

Story 1

CUET UG 2026: 28 मई की परीक्षा अचानक स्थगित, बकरीद की छुट्टी के चलते NTA का बड़ा फैसला

Story 1

IPL 2026: कोहली ने शुभमन गिल की दाढ़ी का उड़ाया मजाक, वायरल वीडियो में दिखी दोनों की प्यारी बॉन्डिंग