बंगाल के नए मुख्य सचिव पर सियासी संग्राम: अमित मालवीय ने राहुल गांधी को केरल के आईने में दिखाया डबल स्टैंडर्ड
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पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव (Chief Secretary) की नियुक्ति को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राज्य में शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव बनाए जाने के फैसले पर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

अब भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए उन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी का इनाम वाला तंज

शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव और रिटायर्ड आईएएस सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया है।

इस पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर हमला बोलते हुए लिखा था, भाजपा-ईसी (EC) के चोर बाजार में - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम। राहुल का इशारा था कि ये नियुक्तियां चुनावों में मदद के बदले दिया गया इनाम है।

अमित मालवीय का पलटवार: नियमों के मुताबिक है नियुक्ति

अमित मालवीय ने राहुल गांधी के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि मनोज अग्रवाल की नियुक्ति पूरी तरह से नियमों के अनुरूप है।

मालवीय ने कहा कि बंगाल की वर्तमान भाजपा सरकार ने राज्य के सबसे सीनियर आईएएस अधिकारी को मुख्य सचिव नियुक्त किया है। उन्होंने ममता बनर्जी के कार्यकाल को याद दिलाते हुए कहा कि तब ममता ने पसंदीदा अफसरों को मलाईदार पद देने के लिए दर्जनों वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार किया था, जिसे राहुल गांधी ने कभी मुद्दा नहीं बनाया।

केरल का उदाहरण देकर घेरा

अमित मालवीय ने राहुल गांधी को घेरने के लिए कांग्रेस शासित राज्य केरल का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि केरल में 2003 बैच के आईएएस अधिकारी रतन यू केलकर को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का सचिव बनाया जा रहा है, जबकि वे राज्य के सबसे वरिष्ठ अधिकारी नहीं हैं।

मालवीय ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि केलकर एक साथ मुख्यमंत्री के सचिव और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) दोनों पदों पर कैसे बने रह सकते हैं?

क्या राहुल का गुस्सा चयनात्मक है?

अमित मालवीय ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या संस्थागत मर्यादा और नियमों पर राहुल गांधी का ज्ञान सिर्फ भाजपा सरकारों के लिए आरक्षित है?

मालवीय का तर्क है कि जब कांग्रेस या उसके सहयोगी दल नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं, तो राहुल गांधी चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का चुनिंदा आक्रोश (Selective Outrage) एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है।

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