कोलकाता में मार्को रुबियो: विवादित मिशनरीज ऑफ चैरिटी का दौरा क्यों बना चर्चा का विषय?
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने भारत दौरे की शुरुआत सीधे कोलकाता से की है। पिछले 14 वर्षों में कोलकाता आने वाले वे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री हैं। इस दौरे के दौरान रुबियो का मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय जाना सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

रुबियो का मिशनरीज ऑफ चैरिटी दौरा कोलकाता पहुँचते ही रुबियो सीधे मदर हाउस (मिशनरीज ऑफ चैरिटी का मुख्यालय) पहुँचे। उन्होंने वहां संस्था के पदाधिकारियों और अन्य लोगों से मुलाकात की। इस दौरे को लेकर अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने कहा कि यह यात्रा भारत और अमेरिका के बीच साझा मूल्यों और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है।

क्या है संस्था और फंडिंग का विवाद? मिशनरीज ऑफ चैरिटी वही संस्था है जिसकी विदेशी फंडिंग पर भारत सरकार ने कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी। 25 दिसंबर 2021 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत संस्था के पंजीकरण के नवीनीकरण से इनकार कर दिया था।

सरकार का तर्क था कि संस्था ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए थे, जिसके चलते यह कदम उठाया गया। हालांकि, जनवरी 2022 में जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सरकार ने संस्था का पंजीकरण बहाल कर दिया था।

प्रतिकूल सूचनाओं का पेंच गृह मंत्रालय ने उस समय स्पष्ट किया था कि कुछ प्रतिकूल सूचनाएं मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। उस दौरान यह भी आरोप लगे थे कि सरकार ने संस्था के बैंक खाते जब्त कर लिए हैं, हालांकि मंत्रालय ने साफ किया कि उन्होंने खाते जब्त नहीं किए थे, बल्कि बैंक ने सूचित किया था कि संस्था ने खुद ही खातों पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।

उस समय इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्षी दलों ने सरकार की कड़ी आलोचना की थी।

मदर टेरेसा की विरासत और महत्व 1953 में मदर टेरेसा द्वारा स्थापित यह संस्था केवल एक एनजीओ नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। आचार्य जगदीश चंद्र रोड पर स्थित यह ‘मदर हाउस’ गरीबों की सेवा का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ मदर टेरेसा का मकबरा और एक संग्रहालय भी है। इसे सेंट ऑफ द गटर्स (गरीबों की संत) के नाम से भी जाना जाता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री की इस यात्रा को कूटनीतिक और मानवीय दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रुबियो का सीधे वहां पहुँचना यह संदेश देता है कि अमेरिका और भारत के बीच कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ साझा सामाजिक मूल्यों की भूमिका भी अहम है।

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