पश्चिम बंगाल में दशकों पुरानी अवैध घुसपैठ की समस्या पर अब नकेल कसने की तैयारी पूरी हो चुकी है। शुभेंदु सरकार ने बांग्लादेश से सटे संवेदनशील बॉर्डर पर तारबंदी (Fencing) के काम में तेजी ला दी है। राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश है—घुसपैठ को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2200 किलोमीटर का बॉर्डर और तारबंदी की चुनौती पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच करीब 2200 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसमें से 1644 किलोमीटर (75%) हिस्से पर पहले ही तारबंदी हो चुकी है। हालांकि, करीब 569 किलोमीटर का बॉर्डर अभी भी असुरक्षित है, जो राज्य के 9 जिलों से होकर गुजरता है। 2021 के बाद से प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से यह काम ठप पड़ा था।
क्यों रुकी थी तारबंदी? तारबंदी में देरी की मुख्य वजह पिछली ममता सरकार की डायरेक्ट लैंड पर्चेस पॉलिसी थी। इस नीति के तहत, एक-एक जमीन मालिक से सहमति लेना अनिवार्य था। यदि कोई किसान या भू-स्वामी अपनी जमीन देने से मना कर देता, तो फेंसिंग का काम रुक जाता था। अब नई सरकार ने इस बाधा को खत्म करते हुए काम में तेजी लाने का निर्णय लिया है।
अब खुश है स्थानीय जनता बॉर्डर पर रहने वाले लोग सालों से घुसपैठ की समस्या से जूझ रहे थे। पहले तारबंदी को किसानों की समस्या बताया जाता था, लेकिन अब स्थानीय लोग ही इस सुरक्षा घेरे का स्वागत कर रहे हैं। वे बॉर्डर पर फेंसिंग को अपने लिए एक ढाल मान रहे हैं।
रेलवे रूट पर भी कड़ी नजर घुसपैठिए बॉर्डर पार करने के बाद अक्सर ट्रेन के जरिए कोलकाता जैसे बड़े शहरों तक पहुंच जाते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने रेलवे पुलिस (GRP) को सख्त निर्देश दिए हैं। पकड़े गए घुसपैठियों को अब सीधे बोंगांव या बशीरहाट बॉर्डर पर बीएसएफ (BSF) को सौंपने के लिए कहा गया है ताकि उन्हें वापस भेजा जा सके। साथ ही, राज्य में डिटेंशन सेंटर बनाने की चर्चा भी तेज हो गई है।
असम मॉडल से बदलेगी बंगाल की तस्वीर? शुभेंदु सरकार अब असम के एंटी-घुसपैठिया मॉडल की ओर कदम बढ़ा रही है। हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में हजारों घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा है और बड़ी संख्या में लोगों को डिटेंशन सेंटर में रखा है। इसी सफलता को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार भी अब घुसपैठियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रही है।
एक कठिन लेकिन जरूरी मिशन देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या लाखों में होने का अनुमान है। इस समस्या का समाधान रातो-रात संभव नहीं है, लेकिन बॉर्डर की घेराबंदी और सख्त नीतियों से संदेश साफ है—भारत की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अवैध घुसपैठियों को हटाना अब प्राथमिकता है।
*#DNAमित्रों | अब घुसपैठिया बंगाल में घुस नहीं पाएगा... बंगाल बॉर्डर से तारबंदी की ग्राउंड रिपोर्ट#DNA #DNAWithRahulSinha #Westbengal @RahulSinhaTV pic.twitter.com/dFv04D0dXx
— Zee News (@ZeeNews) May 22, 2026
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