4 साल तक पास्टर रहा, अब मूल धर्म ही अंतिम सत्य : कवर्धा में 200 आदिवासियों की घर वापसी
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छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया इलाके में एक बड़ा धर्मांतरण विरोधी घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व पास्टर भानु सिंह धुर्वे सहित आदिवासी समुदाय के 200 लोगों ने ईसाई धर्म त्यागकर अपने मूल हिंदू धर्म में वापसी की है।

बहकावे में आकर बदला था धर्म पूर्व पास्टर भानु सिंह धुर्वे ने बताया कि वे 8 साल पहले ईसाई धर्म में शामिल हुए थे और पिछले 4 वर्षों से पास्टर के रूप में सक्रिय थे। उन्होंने स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी और बाहरी लोगों के बहकावे में आकर उन्होंने यह कदम उठाया था। धुर्वे के अनुसार, ईसाई बनने के बाद सामाजिक स्तर पर उन्हें अलगाव का सामना करना पड़ा और पड़ोसी भी उनसे दूरी बनाने लगे थे।

विधायक ने पैर धोकर किया स्वागत इस घर वापसी कार्यक्रम का नेतृत्व पंडरिया की भाजपा विधायक भावना बोहरा ने किया। उन्होंने पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से इन 200 आदिवासियों का स्वागत किया। इस भावुक मौके पर विधायक ने उनके पैर धोकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः सम्मानजनक स्थान दिया।

750 लोगों की अब तक घर वापसी विधायक भावना बोहरा ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के बाद से उनके क्षेत्र में घर वापसी का विशेष अभियान चल रहा है। अब तक लगभग 700 से 750 आदिवासी अपने मूल धर्म में लौट चुके हैं। विधायक ने आरोप लगाया कि गरीब आदिवासियों को प्रलोभन देकर और लालच में फंसाकर उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया था।

शिक्षा और जागरूकता ही समाधान विधायक ने जोर देकर कहा कि जब समाज शिक्षित और जागरूक होता है, तो वह किसी भी प्रकार के प्रलोभन में नहीं आता। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से वनांचल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिससे आदिवासियों में आत्मविश्वास लौटा है। अब ये लोग बिना किसी दबाव के अपने मूल धर्म की ओर लौट रहे हैं।

धर्मांतरण पर चौतरफा कार्रवाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्ती बढ़ गई है। गुना जिले में पुलिस ने हाल ही में दो पादरियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन पर आरोप है कि वे प्रार्थना से इलाज का झांसा देकर गरीब और बीमार लोगों को बरगला रहे थे। इन मामलों ने धर्मांतरण के नाम पर चल रहे संदिग्ध खेल पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

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