ट्रंप का मूड-स्विंग कूटनीति: पोलैंड में 5,000 सैनिकों का ऐलान, क्या पुतिन के लिए खुला नया रास्ता?
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वैश्विक राजनीति अब किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की तरह हो गई है, जिसके इकलौते निर्देशक और अभिनेता डोनाल्ड ट्रंप हैं। ट्रंप का एक सोशल मीडिया पोस्ट पूरी दुनिया के वर्ल्ड ऑर्डर को हिलाकर रख देता है। रणनीतिकार और कूटनीतिज्ञ अब ठोस नीतियों के बजाय ट्रंप के मूड और उनकी पर्सनल केमिस्ट्री के भरोसे भविष्य देख रहे हैं।

भ्रम की स्थिति: क्या सैनिक घटेंगे या बढ़ेंगे? हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने जोर-शोर से घोषणा की थी कि यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम की जाएगी। इसके तहत पोलैंड में तैनात होने वाले 4,000 सैनिकों की तैनाती रद्द कर दी गई थी और जर्मनी से भी सैन्य कटौती की बात कही गई थी। लेकिन गुरुवार को ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर किए गए एक पोस्ट ने इस पूरी रणनीति को पलट दिया।

ट्रंप का नया ऐलान और पोलैंड का कनेक्शन ट्रंप ने ऐलान किया कि वे पोलैंड में अतिरिक्त 5,000 सैनिक भेजेंगे। उन्होंने इस फैसले का आधार पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोकी की हालिया चुनावी जीत और उनके साथ अपने मधुर संबंधों को बताया। इस घोषणा ने नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच भारी भ्रम पैदा कर दिया है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही प्रशासन सैनिकों की भारी कटौती की बात कर रहा था।

ईरान और जर्मनी को लेकर अनिश्चितता ट्रंप प्रशासन पहले ही जर्मनी में सैन्य कटौती की पुष्टि कर चुका है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ द्वारा ईरानी नेतृत्व को लेकर की गई आलोचना और युद्ध रणनीति पर उठाये गए सवालों के बाद ट्रंप ने सैनिकों की संख्या में कटौती का फैसला लिया था। अब यह विरोधाभासी कदम यूरोप में अमेरिकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर रहा है।

पुतिन को क्या संकेत? डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों दलों के सांसद इस अनिश्चितता से चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ये मूड-स्विंग फैसले न केवल नाटो सहयोगियों को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गलत संदेश भी दे रहे हैं। कहीं यह अस्थिरता पुतिन के लिए सीधा न्योता तो नहीं है?

कूटनीति या केवल व्यक्तिगत केमिस्ट्री? ट्रंप का यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि अब अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नीतियां किसी पारंपरिक सैन्य प्रोटोकॉल के बजाय व्यक्तिगत पसंद और नाराजगी के इर्द-गिर्द घूम रही हैं। दोस्त हैरान हैं और दुश्मन इस अस्थिरता का लाभ उठाने की ताक में हैं। अमेरिका की यह रोलरकोस्टर कूटनीति दुनिया को किस मोड़ पर ले जाएगी, यह बड़ा सवाल बन गया है।

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