दीवार के दो होनहार उत्तराधिकारी: राहुल द्रविड़ के बेटे बढ़ा रहे हैं क्रिकेट में पापा का मान
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भारतीय क्रिकेट के दीवार कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ का करियर और अनुशासन किसी परिचय का मोहताज नहीं है। मैदान पर अपनी संयमित बल्लेबाजी और मैदान के बाहर कोच के रूप में भारतीय टीम को शिखर तक पहुंचाने के बाद, अब द्रविड़ परिवार की अगली पीढ़ी क्रिकेट की पिच पर अपना दम दिखा रही है।

सादगी और संस्कारों की नींव इंदौर में जन्मे राहुल द्रविड़ का सफर एक अनुशासनप्रिय परिवार से शुरू हुआ। उनके पिता शरद द्रविड़ और मां पुष्पा द्रविड़ ने उन्हें जो संस्कार दिए, वे आज भी उनके व्यक्तित्व में झलकते हैं। 2003 में डॉ. विजेता पेंढारकर से शादी के बाद द्रविड़ का परिवार और भी मजबूत हुआ। विजेता ने हमेशा राहुल की सफलता के पीछे एक मजबूत स्तंभ का काम किया है।

मीडिया की चकाचौंध से दूर, क्रिकेट में पैठ राहुल और विजेता के दो बेटे हैं—समित और अन्वय। द्रविड़ ने हमेशा इस बात का ध्यान रखा है कि उनके बच्चे मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर अपने खेल पर ध्यान दें। हालांकि, अब उनके दोनों बेटे अपनी प्रतिभा से सुर्खियों में आने लगे हैं। अच्छी बात यह है कि राहुल ने उन पर कभी भी क्रिकेट खेलने का दबाव नहीं डाला।

समित द्रविड़: एक उभरता हुआ ऑलराउंडर द्रविड़ के बड़े बेटे समित (जन्म 2005) एक बेहतरीन ऑलराउंडर हैं। उन्होंने कर्नाटक की आयु वर्ग की टीमों में अपनी पहचान बनाई है। कूच बेहार ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने न केवल रन बनाए, बल्कि विकेट भी चटकाए हैं। 2024 में भारत की अंडर-19 टीम में उनका चयन उनकी मेहनत का प्रमाण है। इसके अलावा, वह महाराजा ट्रॉफी (KSCA T20) में भी अपनी छाप छोड़ चुके हैं।

अन्वय द्रविड़: विकेटकीपिंग में उस्ताद छोटे बेटे अन्वय (जन्म 2009) अपनी विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी से प्रभावित कर रहे हैं। विजय मर्चेंट ट्रॉफी (U-16) में कर्नाटक के लिए खेलते हुए उन्होंने 45 के औसत से रन बनाकर अपनी काबिलियत साबित की है। वे वीनू मांकड़ों ट्रॉफी में कर्नाटक टीम की कप्तानी भी संभाल चुके हैं।

राहुल द्रविड़ भले ही अब कोचिंग की भूमिका से दूर हों, लेकिन उनके बेटों का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि द्रविड़ परिवार का क्रिकेट के मैदान से रिश्ता अभी बहुत लंबा चलने वाला है।

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