हाथों के सहारे एवरेस्ट फतह कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो आसमान की ऊंचाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं। रूस के रुस्तम नाबिएव ने इस बात को सच कर दिखाया है। दोनों पैरों से दिव्यांग रुस्तम ने बिना किसी कृत्रिम पैरों (Prosthetics) की मदद लिए, केवल अपने हाथों के बल पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) को फतह करके इतिहास रच दिया है।
2015 का दर्दनाक हादसा रुस्तम की यह उपलब्धि जितनी प्रेरणादायक है, उनका अतीत उतना ही दर्दनाक रहा है। साल 2015 में एक सैन्य बैरक के अचानक ढह जाने से उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए थे। उस हादसे में कई सैनिकों की जान गई और रुस्तम की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। व्हीलचेयर तक सीमित रहने के बजाय, उन्होंने पहाड़ों की कठिन चढ़ाई को अपनी चुनौती बनाने का फैसला किया।
जानलेवा रास्तों को दी मात 20 मई की सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर उन्होंने एवरेस्ट के शिखर पर रूसी झंडा फहराया। बेस कैंप के अधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण थी। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे रुस्तम अपने हाथों के दम पर एवरेस्ट के सबसे खतरनाक हिस्से खुंबू हिमपात (Khumbu Icefall) को पार कर रहे हैं। इस कठिन रास्ते को तय कर कैंप-1 तक पहुंचने में उन्हें करीब 15 घंटे का समय लगा।
दुनिया के लिए एक भावुक संदेश एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने के बाद रुस्तम ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, मैं यह जीत उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं जो मुझे देख रहे हैं। मैं दुनिया से बस यही कहना चाहता हूं कि जब तक सांस है, तब तक लड़ो, क्योंकि हर प्रयास सार्थक होता है।
अनूठा कीर्तिमान यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इससे पहले एवरेस्ट फतह करने वाले दिव्यांग पर्वतारोही कृत्रिम पैरों (Prosthetics) का सहारा लेते थे। बिना किसी कृत्रिम अंग के, सिर्फ हाथों के दम पर एवरेस्ट फतह करने वाले रुस्तम दुनिया के पहले पर्वतारोही बन गए हैं। इससे पहले वह माउंट मनास्लू और माउंट एल्ब्रस पर भी अपनी शारीरिक बाधाओं को धता बताते हुए चढ़ाई कर चुके हैं। रुस्तम की यह कहानी साबित करती है कि इंसान की असली विकलांगता उसके शरीर में नहीं, बल्कि उसके विचारों में होती है।
Russian double-amputee mountaineer Rustam Nabiev has successfully scaled Mt #Everest (8848.86 m) yesterday, 20.05.2026 NPT.
— Everest Today (@EverestToday) May 21, 2026
Rustam, who lost both legs in a military barracks collapse in 2015, has now stood atop the world’s highest mountain, achieving one of the most inspiring… pic.twitter.com/x7uRFPZGH8
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