भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) के मोर्चे पर पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़ा रणनीतिक दांव चल दिया है। चिनाब नदी पर दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के जरिए भारत अब पानी के बहाव और उसके प्रबंधन पर अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है। इससे पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
2,600 करोड़ रुपये का निवेश नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) ने चिनाब नदी पर दो बड़ी परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। इन पर कुल 2,600 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पहला प्रोजेक्ट चिनाब-ब्यास लिंक टनल है, जिस पर 2,352 करोड़ रुपये की लागत आएगी। दूसरा काम सलाल बांध पर गाद प्रबंधन (Silt Management) प्रणाली को बहाल करना है, ताकि जलविद्युत उत्पादन की क्षमता बनी रहे।
8.7 किमी लंबी सुरंग का जाल भारत लाहौल-स्पीति के कठिन हिमालयी इलाके में 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कर रहा है। इस सुरंग के जरिए चिनाब की सहायक नदी चंद्रा के पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ा जाएगा। इसके लिए लाहौल घाटी में नदी पर एक 19 मीटर ऊंचा बैराज भी बनाया जा रहा है। यह पूरा ढांचा हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना होगा।
रणनीतिक रूप से अहम इलाका यह सुरंग कोसकर गांव के पास और अटल टनल के उत्तरी प्रवेश द्वार के ऊपर के क्षेत्र में बन रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक जलविद्युत परियोजना नहीं है, बल्कि पश्चिमी नदियों के जल का भारत द्वारा अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की एक सोची-समझी रणनीति है। हिमालयी क्षेत्र में भारत के बढ़ते बुनियादी ढांचे ने सीमा पार हलचल बढ़ा दी है।
सिंधु जल संधि पर सख्त रुख 1960 की सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को चिनाब, झेलम और सिंधु नदियों पर प्राथमिक अधिकार प्राप्त हैं। हालांकि, हालिया आतंकी हमलों और कूटनीतिक तनाव के बाद भारत ने अब अपना रुख कड़ा कर लिया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि संधि के दायरे में रहते हुए वह अपनी जलविद्युत परियोजनाओं और जल के उपयोग के अधिकारों का पूरा इस्तेमाल करेगा।
यह कदम पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, जो अपनी कृषि और ऊर्जा जरूरतों के लिए चिनाब के पानी पर पूरी तरह निर्भर है। भारत की यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पड़ोसी देश पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिहाज से भी गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
After putting the Indus Waters Treaty in abeyance, India doubles down strategically with back to back strikes
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) May 21, 2026
🇮🇳 Plans: • 8.7 km tunnel to divert Chenab waters to Beas basin
• Sediment tunnel at Salal Dam
• 2 major Chenab projects worth ₹2,600 crore pic.twitter.com/MzwVTWOTbx
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