वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बर्थराइट सिटीजनशिप (जन्म से नागरिकता) को खत्म करने की अपनी मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है। ट्रंप ने तर्क दिया है कि अमेरिका की धरती पर जन्म लेने मात्र से नागरिकता मिलने का प्रावधान विदेशी अरबपतियों के लिए नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से गुलामों के बच्चों के संरक्षण के लिए बनाया गया था।
क्या है ट्रंप का तर्क? एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा, हम दुनिया के एकमात्र ऐसे देश हैं जहां यह व्यवस्था अभी भी मौजूद है। आप अमेरिका की धरती पर कदम रखते हैं और अचानक नागरिक बन जाते हैं। यह कानून चीनी अरबपतियों के लिए नहीं, बल्कि गुलामों के बच्चों के लिए था। उन्होंने इस व्यवस्था को देश के लिए आर्थिक आपदा की तरह बताया।
सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ नाराजगी ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कोर्ट उनके खिलाफ फैसला सुनाती है, तो यह बेहद शर्मनाक होगा। राष्ट्रपति ने कहा, वे (जज) शायद मेरे खिलाफ फैसला देंगे, क्योंकि उन्हें ऐसा करना अच्छा लगता है। उन्होंने अपने द्वारा नामित जजों से भी उम्मीद जताई कि वे इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर देशहित में फैसला लेंगे।
इमिग्रेशन एजेंडा का अहम हिस्सा यह मामला ट्रंप के सख्त इमिग्रेशन एजेंडे का केंद्र बना हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवासियों पर लगाम कसना और बिना दस्तावेजों के अमेरिका में रहने वाले लोगों को बाहर निकालना है। हालिया सुनवाई में ट्रंप खुद अदालत में मौजूद रहे, जो इतिहास में किसी मौजूदा राष्ट्रपति द्वारा ऐसा करने का पहला मामला था।
संविधान और अधिकारों की लड़ाई ट्रंप के आलोचकों का कहना है कि 14वां संविधान संशोधन अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले हर व्यक्ति को नागरिकता की गारंटी देता है। निचली अदालतों ने भी ट्रंप के आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। हालांकि, नौ सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट में कंजर्वेटिव जजों का बहुमत ट्रंप की उम्मीदों को बढ़ाता है, लेकिन अंतिम फैसला क्या होगा, यह अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
President Trump on birthright citizenship: You step in our country and all of a sudden you re citizen — this was not meant for Chinese billionaires — this was meant for the babies of slaves. pic.twitter.com/nLZGWIwlkI
— CSPAN (@cspan) May 21, 2026
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