मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और संवेदनशीलता बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें भोजशाला को माता वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना गया था। कमल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी ने एसएलपी (SLP) दायर कर अपनी दलीलें पेश की हैं। उनका कहना है कि वे उन तथ्यों को शीर्ष अदालत के सामने रखेंगे जिन्हें हाई कोर्ट में पूरी तरह नहीं रखा जा सका। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह स्थान मस्जिद है और वे नमाज का अपना अधिकार बहाल कराने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
आज का दिन: महाआरती बनाम जुमे की नमाज हाई कोर्ट के आदेश के बाद आज का शुक्रवार धार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ मुस्लिम पक्ष ने नमाज अदा करने की तैयारी की है, तो दूसरी ओर हिंदू संगठनों ने महाआरती का आह्वान किया है। भोज उत्सव समिति के अनुसार, 721 साल बाद यह पहला मौका है जब हिंदू समाज पूरे अधिकार के साथ भोजशाला में पूजा कर सकेगा।
धार बना अभेद्य किला प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए धार शहर को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है। शहर में सुरक्षा की 9 लेयर बनाई गई हैं और 1500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार फ्लैग मार्च कर रहे हैं, जबकि ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखने का आदेश दिया है। किसी भी तरह की भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर और एसपी ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट के फैसले का अक्षरशः पालन कराया जाएगा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विवाद की पृष्ठभूमि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने हाल ही में एएसआई (ASI) की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और परिसर में मिले संस्कृत अभिलेखों व हिंदू प्रतीकों को आधार बनाकर भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर माना था। इस फैसले ने दशकों पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है, जिसके तहत 2003 के एएसआई आदेशानुसार हिंदुओं को केवल मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति थी, जबकि शुक्रवार को नमाज पढ़ी जाती थी।
*#WATCH | Dhar, Madhya Pradesh: On Bhojshala-Kamal Maula Verdict, Kamal Maulana Welfare Society President Abdul Samad says, SLP has been filed on our behalf in the Supreme Court... This matter, which we could not put before the High Court, we will try to put our point through the… pic.twitter.com/wqdrr1ODz0
— ANI (@ANI) May 21, 2026
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