सीबीएसई (CBSE) 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद विवादों का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बार मामला कम अंकों का नहीं, बल्कि उत्तर पुस्तिकाओं की खराब स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर उठ रहे सवालों का है। सोशल मीडिया पर छात्र अपनी कॉपियों के धुंधले और कटे-फटे स्क्रीनशॉट शेयर कर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
छात्रों का दावा है कि डाउनलोड की गई उत्तर पुस्तिकाएं इतनी धुंधली हैं कि वे खुद अपनी लिखावट नहीं पढ़ पा रहे हैं। कई कॉपियों में पेज टेढ़े हैं, लिखावट कटी हुई है और कहीं-कहीं टाइम स्टैम्प जैसे डिजिटल एलिमेंट्स टेक्स्ट को छिपा रहे हैं। छात्रों का सीधा सवाल है कि अगर स्कैनिंग इतनी खराब है, तो शिक्षकों ने इन कॉपियों का मूल्यांकन कैसे किया होगा?
छात्रों और अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि डिजिटल युग में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सिस्टम इतना लचर क्यों है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में छात्रों ने इसे सिस्टम की बड़ी लापरवाही करार दिया है। छात्रों का कहना है कि अब उन्हें अपनी ही कॉपियों की री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक तनाव में हैं।
विवाद बढ़ता देख सीबीएसई ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग और स्कैनिंग प्रक्रिया अत्यंत सावधानी से पूरी की गई है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को बोर्ड ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। सीबीएसई ने छात्रों से केवल आधिकारिक पोर्टल पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।
इससे पहले कॉपियां डाउनलोड करते समय भी छात्र खासे परेशान हुए। वेबसाइट के बार-बार क्रैश होने और धीमी गति के कारण हजारों छात्र समय पर अपनी कॉपी नहीं देख पाए। हालांकि, बढ़ते दबाव के बाद बोर्ड ने आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 23 मई कर दिया।
बोर्ड ने पहले स्पष्ट किया था कि करीब 90 लाख उत्तर पुस्तिकाओं में से लगभग 13 हजार कॉपियों को स्कैनिंग में दिक्कत के कारण मैनुअल (हाथ से) चेक किया गया था। लेकिन अब वायरल हो रही धुंधली कॉपियों ने बाकी कॉपियों की गुणवत्ता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। फिलहाल, छात्र अब अपनी री-चेकिंग के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उन्हें वास्तविक प्रदर्शन का पता चल सके।
Dear @cbseindia29,
— Anurag Tyagi (@TheAnuragTyagi) May 21, 2026
क्या students मज़ाक हैं? 💔
Copies इतनी खराब scan हुई हैं
कि कई जगह students खुद अपनी writing नहीं पढ़ पा रहे…
फिर teachers से कैसे उम्मीद की गई
कि वे accurately checking कर देंगे?
Blurred pages, unclear scans, OSM confusion —
और इसकी कीमत लाखों बच्चों के… pic.twitter.com/uRlXBr9eVc
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