पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बेहद सख्त आदेश जारी किया है। इस नए फरमान के तहत कर्मचारियों पर मीडिया में बयान देने, डिबेट में भाग लेने और सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
क्या हैं नए नियम? राज्य के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा बुधवार रात जारी इस आदेश में साफ कहा गया है कि कर्मचारी अब न तो मीडिया से बात कर सकते हैं, न ही कोई लेख लिख सकते हैं और न ही किसी टीवी डिबेट या कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करना या लीक करना भी अब कानूनी कार्रवाई का आधार होगा।
अभिषेक बनर्जी का तीखा हमला तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी ने इस आदेश को खतरनाक करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए कहा, यह आदेश प्रशासन को सुचारू बनाने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों को चुप कराने के लिए है। यह शासन की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि चुप्पी थोपने के लिए है।
लोकतंत्र के लिए खतरा अभिषेक बनर्जी ने आगे कहा कि सरकार का यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चाहती है कि कर्मचारी ठीक वैसा ही सोचें और बोलें जैसा उन्हें निर्देशित किया जाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र का गला घोंटना करार देते हुए कहा कि जब कोई सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकती, तो वह असहमति को कुचलने का रास्ता अपनाती है।
किन पर लागू होगा यह आदेश? यह सख्त फरमान केवल चुनिंदा विभागों तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में आईएएस (IAS), डब्ल्यूबीसीएस (WBCS) और डब्ल्यूबीपीएस (WBPS) के अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के अधीन आने वाले सभी कर्मचारी, नगर पालिकाएं, नगर निगम, राज्य संचालित बोर्ड और सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारी भी आएंगे।
कानूनी आधार का तर्क सरकारी सूत्रों का कहना है कि ये प्रतिबंध पहले से मौजूद नियमों के तहत लगाए गए हैं। इसमें अखिल भारतीय सेवा (AIS) आचरण नियम 1968, पश्चिम बंगाल सेवा नियम 1980 और पश्चिम बंगाल सरकारी सेवक आचरण नियम 1959 का हवाला दिया गया है। हालांकि, विपक्ष इसे दिल्ली के आकाओं को खुश करने की कवायद बताकर सरकार को घेर रहा है।
“Complete prohibition.”
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) May 21, 2026
The phrase echoes through this circular like a WARNING - not to protect governance, but to ENFORCE SILENCE upon Govt employees across #Bengal.
No speaking to the press.
No writing articles.
No participating in media programs.
No criticism of the… pic.twitter.com/nTVWxkuWVX
लापता बेटी को ढूंढने के बदले मांगी डीजल की रिश्वत , नागपुर पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
रूसी तेल रिफाइनरी पर यूक्रेन का बड़ा हमला: 800 किमी दूर सिजरान में दहला पुतिन का गढ़
पीएम मोदी पर सवाल उठाने वाली पत्रकार को नॉर्वे के पूर्व मंत्री ने दिया करारा जवाब, भारतीय लोकतंत्र का किया जोरदार बचाव
यूपी में 11 हजार आरक्षित पदों पर डाका ? अखिलेश यादव के PDA ऑडिट ने मचाया सियासी तूफान
KKR की जीत के बाद शाहरुख खान का भावुक वीडियो वायरल, मनीष पांडे को गले लगाकर लुटाया प्यार
₹10,999 में लॉन्च हुआ HMD Vibe 2 5G: धाकड़ बैटरी और दमदार कैमरा का नया धमाका
बांद्रा में अवैध मस्जिद पर बुलडोजर: कार्रवाई करने पहुंची पुलिस पर पथराव, औरतों को ढाल बनाकर किया हमला
ईरान के बाद अब ट्रंप का अगला टारगेट क्यूबा? कैरेबियन सागर में तैनात हुआ घातक अमेरिकी युद्धपोत
दिल्ली वालों सावधान: नवादा मेट्रो के पास 45 दिन बंद रहेगा रास्ता, रूट बदलने की तैयारी कर लें
एलन मस्क भी हुए हैरान: चीन ने रोबोट सेना से खड़ा कर दिया दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन