ओस्लो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया नॉर्वे यात्रा के दौरान एक पत्रकार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर उठाए गए सवाल पर विवाद थमता नहीं दिख रहा है। अब नॉर्वे के पूर्व पर्यावरण मंत्री एरिक सोल्हेम ने उस पत्रकार को आड़े हाथ लेते हुए भारतीय लोकतंत्र के पक्ष में एक तार्किक और कड़ा बयान दिया है।
पत्रकार की आलोचना पर भड़के पूर्व मंत्री नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग ने पीएम मोदी से सवाल किया था कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते, साथ ही उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की स्थिति पर भी सवाल उठाए थे। एरिक सोल्हेम ने सोशल मीडिया पर इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि शायद अब समय आ गया है कि आलोचक भारत के बारे में थोड़ी जिज्ञासा रखें और जमीनी हकीकत को समझें।
मतदान प्रतिशत से दिया तर्क सोल्हेम ने भारत के चुनाव परिणामों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में मतदाता अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गहरा भरोसा करते हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मतदान का प्रतिशत 94% तक रहा, जबकि नॉर्वे या यूरोप के कई देशों में यह आंकड़ा 50-60% से भी कम रहता है। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों में विविधता ही इस बात का प्रमाण है कि भारतीय लोकतंत्र जनता की इच्छा का सम्मान करता है।
रैंकिंग पर उठाए सवाल पत्रकार द्वारा भारत को लोकतंत्र सूचकांक में 157वें स्थान पर रखे जाने का जिक्र करने पर सोल्हेम ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी रैंकिंग सामान्य बुद्धि के विपरीत है। उन्होंने साल्वाटोर बैबोन्स की किताब धर्म डेमोक्रेसी (Dharm Democracy) पढ़ने की सलाह दी, जो इन तथाकथित इंडेक्स की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली का पर्दाफाश करती है।
भारत: यूरोप-अमेरिका से कहीं ज्यादा सुरक्षित सोल्हेम ने दो टूक कहा कि भारत में पत्रकारों के लिए खतरा होने का दावा बेबुनियाद है। उन्होंने तर्क दिया कि असल में अमेरिका और दुनिया के कई अन्य देश पत्रकारों के लिए अधिक खतरनाक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विशाल विविधता और जनसंख्या के बावजूद भारत, अमेरिका और यूरोप के मुकाबले कहीं ज्यादा शांतिपूर्ण देश है।
भारतीय लोकतंत्र पूरी तरह से स्वदेशी है पूर्व मंत्री ने इस औपनिवेशिक मानसिकता को भी खारिज कर दिया कि लोकतंत्र पश्चिम की देन है। उन्होंने सवाल किया कि यदि अंग्रेजों ने लोकतंत्र सिखाया था, तो पाकिस्तान, म्यांमार या खाड़ी के देश आज लोकतांत्रिक क्यों नहीं हैं? सोल्हेम ने निष्कर्ष निकाला कि भारतीय लोकतंत्र न केवल पूरी तरह से स्वदेशी है, बल्कि असाधारण रूप से सफल भी रहा है।
In defense of Indian 🇮🇳 democracy!
— Erik Solheim (@ErikSolheim) May 20, 2026
During Prime Minister Narendra Modi most successful visit to Norway a minor incident happened. A Norwegian journalist demanded that the prime minister starts holding press conferences. She claimed that Indian democracy is in bad shape.
May be… pic.twitter.com/NKmPO1jNkF
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