नई दिल्ली: केंद्र सरकार के एक फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति और डिफेंस सेक्टर में खलबली मचा दी है। भारत के सबसे महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) का टेस्टिंग और इंटीग्रेशन हब अब तमिलनाडु में नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश में बनेगा। इसे मुख्यमंत्री थलपति विजय के लिए सत्ता संभालने के तुरंत बाद एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्या है मामला? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में पुट्टापर्थी में 15,000 करोड़ रुपये के AMCA डिफेंस हब की आधारशिला रखी। यह प्रोजेक्ट भारत की आत्मनिर्भरता का एक अहम हिस्सा है, जिसे पहले तमिलनाडु के होसुर में स्थापित करने की योजना थी।
तमिलनाडु क्यों था बेहतर विकल्प? विशेषज्ञों के मुताबिक, तमिलनाडु इस प्रोजेक्ट के लिए कहीं अधिक उपयुक्त था। होसुर में प्रस्तावित रनवे की लंबाई 3.5 किलोमीटर थी, जो AMCA जैसे जटिल विमानों के परीक्षण के लिए आदर्श है। इसके अलावा, तमिलनाडु सरकार ने 100 एकड़ जमीन मुफ्त देने और बेंगलुरु में स्थित वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) के निकट होने का लाभ भी पेश किया था। इसके उलट, आंध्र प्रदेश में रनवे को 3 किलोमीटर तक बढ़ाने के लिए जमीन का अतिरिक्त अधिग्रहण करना होगा।
विशेषज्ञों का तीखा हमला इस बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं। तमिलनाडु के विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से राजनीतिक है और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना के खिलाफ है। जानकारों का कहना है कि तीन साल से चल रही बातचीत और तकनीकी तैयारी के बावजूद प्रोजेक्ट का अचानक राज्य बदलना तमिलनाडु के साथ घोर अन्याय है।
DRDO की चुप्पी पर सवाल हैरानी की बात यह है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस साइट बदलाव को लेकर अब तक कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। तकनीकी रूप से अनुकूल बुनियादी ढांचा होने के बावजूद प्रोजेक्ट को स्थानांतरित करना डिफेंस हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है AMCA की खासियत? AMCA भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी है, जो इसे दुश्मन के रडार से अदृश्य रखती है। इसके अलावा, इसकी सुपरसोनिक उड़ान क्षमता, उन्नत डिजिटल सिस्टम और घातक हथियार ले जाने की ताकत इसे भारतीय वायुसेना के लिए एक गेम-चेंजर बनाती है।
थलपति विजय के लिए बड़ी चुनौती 10 मई, 2026 को मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले थलपति विजय के लिए यह घटना राज्य के औद्योगिक और रणनीतिक हितों की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ी अग्निपरीक्षा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि तमिलनाडु को अपनी विकास यात्रा बरकरार रखनी है, तो सरकार को निवेश सुरक्षित करने के लिए अधिक आक्रामक और दूरदर्शी रुख अपनाना होगा।
Attended the Ground Breaking ceremony and Foundation Stone laying ceremonies for a range of strategic aerospace and defence projects at Puttaparthi in Andhra Pradesh.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) May 15, 2026
The commencement of these projects is significant as Aatmanirbharta in defence manufacturing is a critical… pic.twitter.com/2811cJcEGi
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