रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। दोनों नेताओं ने एक ऐसी रणनीति पर काम शुरू किया है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती दे रही है। यह कदम न केवल अमेरिका के लिए बड़ा झटका है, बल्कि भारत के लिए भी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के नए द्वार खोलने वाला है।
डॉलर को बाय-बाय , नेशनल करेंसी का बोलबाला
चीन दौरे पर पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस और चीन अब अपना सारा व्यापार नेशनल करेंसी में कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक ऐसी स्थिर प्रणाली बताया है, जो वैश्विक बाजार के नकारात्मक रुझानों और बाहरी हस्तक्षेप से पूरी तरह सुरक्षित है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत और रूस के बीच होने वाला 96% कारोबार भी अब स्थानीय मुद्राओं में ही सेटल हो रहा है।
जंगलराज पर जिनपिंग का कड़ा प्रहार
इस मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने बिना नाम लिए ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एकतरफा कार्रवाई और बेलगाम दबदबे ने वैश्विक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी हरकतें दुनिया को जंगलराज की ओर धकेल रही हैं। जवाब में, रूस और चीन ने एक मल्टीपोलर (बहु-ध्रुवीय) दुनिया के निर्माण के लिए जॉइंट डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत को होगा सीधा फायदा: आसान होगी क्रूड और फर्टिलाइजर की सप्लाई
भले ही भारत इस द्विपक्षीय योजना का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसके परिणाम भारत के लिए बेहद सकारात्मक होंगे। सबसे बड़ा लाभ नॉर्दर्न सी रूट (NSR) के विकास से मिलेगा। यह समुद्री मार्ग एशिया और यूरोप के बीच यात्रा के समय को करीब 50% तक कम कर देगा।
एनर्जी सिक्योरिटी और लागत में बचत
होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच, यह रूट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए विकल्प बनकर उभरा है। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मैरीटाइम कॉरिडोर के जरिए रूस से तेल, गैस और फर्टिलाइजर का आयात अब न केवल तेज होगा, बल्कि इसमें 30-40% कम ईंधन की खपत होगी। इससे भारत के आयात खर्च में भारी कटौती तय है।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
पुतिन-जिनपिंग का यह कदम भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के लिए मुफीद है। अगर नेशनल करेंसी में व्यापार का मॉडल पूरी तरह सफल होता है, तो भारत को विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) के दबाव से बड़ी राहत मिलेगी। ऊर्जा से लेकर शिपबिल्डिंग तक, यह बदलाव भारत को एक नई आर्थिक मजबूती देने की क्षमता रखता है।
🚨🇷🇺🇨🇳 De-dollarisation: All Russia-China trade is now conducted in national currencies
— Sputnik India (@Sputnik_India) May 20, 2026
We have built a stable system of mutual trade that is protected against any external influence and negative trends on the global markets, said Putin.
🇮🇳 National currencies make up ~96%… https://t.co/QmmZAp6UcZ pic.twitter.com/t6nLcHagha
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