पीएम मोदी और मेलोनी की ग्रीन डिप्लोमेसी : आखिर क्यों लगाया गया काला शहतूत , क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?
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रोम की फिजाओं में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक पौधा लगाया, तो पूरी दुनिया की नजरें उस पर टिक गईं। सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई कि यह कौन सा पौधा है? दरअसल, यह ब्लैक मलबरी (Morus nigra) यानी काले शहतूत का पौधा है। यह कोई महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत और इटली के बीच ग्रीन डिप्लोमेसी का एक मजबूत संदेश है।

इतिहास और संस्कृति का संगम ब्लैक मलबरी का इटली से नाता सदियों पुराना है। यह पेड़ केवल खेती का हिस्सा नहीं, बल्कि इतालवी संस्कृति और वहां के लैंडस्केप की पुरानी यादों में बसा हुआ है। रोमन और मध्यकालीन यूरोप के बगीचों में शहतूत को हमेशा विशेष स्थान प्राप्त रहा है। जहां व्हाइट मलबरी का इस्तेमाल रेशम उद्योग के लिए होता रहा है, वहीं ब्लैक मलबरी को उसकी लंबी उम्र, बेहतरीन फल और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक विशेष सम्मान प्राप्त है।

आयुर्वेद से यूरोप तक जुड़ाव भारत में इसे कृष्ण शहतूत के नाम से जाना जाता है और आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा में इसके औषधीय गुणों को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह पेड़ यूरोप, पश्चिम एशिया और भारत—तीनों क्षेत्रों की व्यापारिक और कृषि परंपराओं को जोड़ता है। यह पौधा दोनों देशों के बीच एक साझा विरासत का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देशों की जड़ें कहीं न कहीं आपस में जुड़ी हुई हैं।

कूटनीति की भाषा: धीरे बढ़ें, लेकिन मजबूत बनें डिप्लोमेसी की दुनिया में इस पौधे का चुनाव काफी सोच-समझकर किया गया है। ब्लैक मलबरी की खासियत है कि यह धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन इसकी जड़ें बेहद गहरी और मजबूत होती हैं। यह कई दशकों तक फल देता है। रणनीतिकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी ने इस पौधे के जरिए दुनिया को संदेश दिया है कि भारत-इटली के रिश्ते जल्दबाजी वाले नहीं, बल्कि स्थायी, भरोसेमंद और समय की हर परीक्षा पर खरे उतरने वाले हैं।

रिश्तों की नई इबारत यह ग्रीन फोटो-ऑप असल में एक गहरे सांस्कृतिक संकेत की तरह है। यह दर्शाता है कि दोनों देश एक ऐसे लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप की ओर बढ़ रहे हैं जो न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि मानवीय और ऐतिहासिक मूल्यों के स्तर पर भी टिकाऊ हो। काले शहतूत का यह पौधा आने वाले वर्षों में भारत और इटली की बढ़ती मित्रता का एक जीता-जागता गवाह बनेगा।

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