आज के डिजिटल युग में घर बैठे सामान मंगाना नया सामान्य (New Normal) हो गया है। खाने से लेकर पानी की बोतल तक, सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध है। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक डिलीवरी बॉय का वीडियो वायरल हुआ है, जिसने ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला? वायरल वीडियो में एक डिलीवरी बॉय अपनी आपबीती साझा कर रहा है। उसने बताया कि उसे एक ग्राहक को 20 रुपये वाली पानी की बोतल डिलीवर करनी थी। ग्राहक ने बताया कि उसने इसके लिए 29 रुपये चुकाए। यानी कंपनी ने वस्तु की कीमत पर अपना मुनाफा जोड़ा।
कंपनी का हैरान करने वाला गणित वीडियो में डिलीवरी बॉय ने खुलासा किया कि इस एक बोतल की डिलीवरी के बदले कंपनी ने उसे 85 रुपये का भुगतान किया। गणित साफ है—20 रुपये की बोतल 29 रुपये में बेची गई, लेकिन उसे पहुंचाने के लिए कंपनी ने राइडर को 85 रुपये खर्च किए। यह देखकर डिलीवरी बॉय खुद भी हैरान है कि कंपनी को इसमें आखिर क्या फायदा हो रहा है।
इन्वेस्टर्स और बर्निंग कैश पर बहस यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और लोग कंपनियों के कैश बर्न मॉडल की आलोचना कर रहे हैं। ट्विटर (X) पर वीडियो साझा करने वाले यूजर ने लिखा, ये कंपनियां मिलकर ऐसा बबल फोड़ने वाली हैं कि सोच कर ही एंग्जायटी होती है। समझ नहीं आता कि इन्वेस्टर्स इनके चंगुल में कैसे फंस जाते हैं।
यूजर की मजेदार प्रतिक्रियाएं इस वीडियो पर नेटिजन्स ने भी जमकर चुटकी ली है। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, ये वही हाल है कि 35 लाख का इन्वेस्टमेंट है, फिर भी 36 लाख का घाटा कैसे हो गया। वहीं, एक अन्य यूजर ने मजाक में कहा, भाई, तुम खुद ही ऑर्डर करो और बाहर जाकर बेच दो, अच्छा मार्जिन मिल जाएगा।
क्या है सच? हालांकि यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन इसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती। यह मामला स्टार्टअप्स के उस बिजनेस मॉडल को दर्शाता है, जहां ग्राहकों को लुभाने के लिए कंपनियां भारी घाटा सहकर भी भारी डिस्काउंट और डिलीवरी ऑफर देती हैं।
(डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर आधारित है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।)
Yahi sab company mil kar aisa bubble phodne wali hain ke soch ke anxiety hoti hai.
— Siddharth s Echelon (@SiddharthKG7) May 19, 2026
Inke changul me investor kaise fas jaate hain wo bhi ek research ka vishay hai.
Ye sab paisa jo yahan burn hota hai, wo koi productive value adding kaam me bhi lag sakta tha, ya koi research me. pic.twitter.com/2HtlI6jw6E
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