# सीएम ऑफिस में सेल्फी वीडियो का बवाल: क्या प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां?
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से ही सी. जोसेफ विजय लगातार चर्चा में हैं। अब उनके कार्यालय (CMO) के अंदर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

क्या है पूरा मामला? हाल ही में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विजय से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति ने सीएम के साथ मीटिंग का सेल्फी वीडियो शूट किया। वीडियो में मुख्यमंत्री गंभीर होकर डेलीगेशन की बातें सुनते नजर आ रहे हैं, जबकि पीछे से वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है।

प्रोटोकॉल पर सवाल यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) एक बेहद संवेदनशील जगह होती है, जहां सख्त प्रोटोकॉल लागू होते हैं। आमतौर पर, आधिकारिक बैठक के दौरान अंदर वीडियो बनाने या ऑडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होती। इस घटना ने सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फैंस क्लब ने की जांच की मांग वीडियो वायरल होने के बाद टीवीके विजय फैंस क्लब ने कड़ी आपत्ति जताई है। फैंस का कहना है कि यह पहली बार है जब सीएम ऑफिस जैसे सुरक्षित स्थान पर इस तरह की लापरवाही देखी गई है। क्लब ने तमिलनाडु सरकार से इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने का आग्रह किया है।

किसने और क्यों बनाया वीडियो? जांच में सामने आया कि वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन्स फॉर पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज के अध्यक्ष सिम्माचंद्रन थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वीडियो दिव्यांग व्यक्तियों के एक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात का हिस्सा था।

सिम्माचंद्रन ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से अनुमति लेने के बाद ही यह वीडियो रिकॉर्ड किया था। उनका उद्देश्य दिव्यांग संगठनों की मुलाकात को रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर साझा करना था।

सरकार की चुप्पी इस अभूतपूर्व घटना पर तमिलनाडु सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताकर आलोचना कर रहे हैं, वहीं कुछ इसे आम जनता के साथ सीएम की सहजता के रूप में भी देख रहे हैं।

बता दें कि थलपति विजय 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे, जिसके बाद से ही वे लगातार लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं। फिलहाल, यह वीडियो शासन के नियमों और जन-संवाद के बीच एक नई बहस का केंद्र बना हुआ है।

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