श्रीनगर की रहने वाली 30 वर्षीय शमीमा के लिए इंसाफ की चक्की ने छह साल तक केवल दर्द ही पीसा। घरेलू हिंसा, पति का अत्याचार और पुलिस की बेरुखी से तंग आ चुकी शमीमा ने उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा श्रीनगर में आयोजित महिला जन सुनवाई उनके लिए नई सुबह बनकर आई।
दहलीज से कोर्ट तक की लंबी लड़ाई शमीमा ने शादी के 10 साल में से अधिकांश वक्त शोषण सहते हुए बिताया। ससुराल वालों ने उसे घर से बाहर निकाल दिया, तो उसने पुलिस की चौखट पर दस्तक दी, लेकिन निराशा हाथ लगी। कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए गुजारा भत्ता और घर में रहने का आदेश दिया। हैरानी की बात यह है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी 6 महीने तक पुलिस उसे अमल में नहीं ला सकी।
ऑन-द-स्पॉट मिला एक्शन शमीमा की उम्मीद तब जगी जब वह आयोग के ‘महिला जन सुनवाई’ कार्यक्रम में पहुंची। यहाँ सुनवाई के नाम पर सिर्फ बातें नहीं हुईं, बल्कि सीधा एक्शन लिया गया। आयोग ने शमीमा की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों के भीतर कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।
जम्मू-कश्मीर में महिला आयोग का शून्य शमीमा का मामला सिस्टम की एक बड़ी कमी को उजागर करता है। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर का अपना राज्य महिला आयोग भंग कर दिया गया है। NCW की अध्यक्ष विजया राहटकर ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते यहां अलग आयोग नहीं हो सकता। फिलहाल, महिलाओं को न्याय के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय आयोग या स्थानीय पुलिस पर निर्भर रहना पड़ रहा है। NCW ने अब गृह मंत्रालय से UT में आयोग का भौतिक कार्यालय खोलने की मांग की है।
बढ़ते अपराध और लंबित न्याय की कतार जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
शमीमा जैसे कुछ मामलों में तो समय पर दखल दे दिया गया है, लेकिन सवाल वही है—उन हजारों महिलाओं का क्या, जो पुलिस और अदालतों की फाइलों के ढेर में आज भी इंसाफ की राह देख रही हैं? क्या 15 दिन का अल्टीमेटम सिर्फ एक खानापूर्ति है, या शमीमा की जीत बाकी महिलाओं के लिए बदलाव की शुरुआत बनेगी?
*#WATCH | Srinagar, J&K | National Commission for Women (NCW) Chairperson Vijaya Kishor Rahatkar says, Now that Jammu and Kashmir has become a Union Territory, there cannot be a separate commission, therefore the National Commission for Women will only take care of it...
— ANI (@ANI) May 19, 2026
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