नार्वे में पीएम मोदी पर अपमानजनक कार्टून: सपेरे के रूप में चित्रण, भारत विरोधी मानसिकता उजागर
News Image

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा के दौरान नार्वे में एक विवादित घटना सामने आई है। वहां के एक प्रमुख अखबार ने पीएम मोदी का एक नस्लवादी कार्टून प्रकाशित किया है, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है।

कार्टून में क्या दिखाया गया? नार्वे के अखबार आफ्टेनपोस्टेन में छपे इस कार्टून में प्रधानमंत्री मोदी को एक पारंपरिक सपेरे के रूप में दर्शाया गया है। उनके सामने रखी टोकरी में सांप की जगह पेट्रोल पंप की पाइप और उसके हैंडल को दिखाया गया है। लेख की हेडलाइन में उन्हें एक चतुर लेकिन परेशान करने वाला व्यक्ति बताया गया है।

नस्लवादी रूढ़िवादिता का आरोप सोशल मीडिया पर इस कार्टून की कड़ी निंदा की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि यह पश्चिमी मीडिया की पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता का हिस्सा है, जो भारत को आज भी सपेरों और अंधविश्वासों के देश के रूप में दिखाने की कोशिश करता है। कई लोगों ने इसे भारतीयों के प्रति अपमानजनक स्टीरियोटाइपिंग करार दिया है।

विवाद के पीछे की असली वजह क्या है? यह पूरा विवाद भारत द्वारा रूस से खरीदे जा रहे तेल को लेकर है। यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल का आयात बढ़ाया है, जिससे यूरोप के कई देश नाराज हैं। उनका आरोप है कि भारत का यह कदम रूस की आर्थिक मदद कर रहा है, जबकि विरोधाभास यह है कि ये देश खुद भी रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं।

प्रेस की स्वतंत्रता और टकराव यह कार्टून ऐसे समय में सामने आया है जब नार्वे में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर पहले ही तनाव देखा जा रहा है। हाल ही में एक पत्रकार ने पीएम मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं से तीखी बहस की थी। उसी पत्रकार ने बाद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया, जिसके बाद यह मुद्दा और गरमा गया।

भारत को नीचा दिखाने की कोशिश? पश्चिमी मीडिया का भारत को लेकर यह नजरिया नया नहीं है। पीएम मोदी ने 2014 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान इस छवि को बदलने का प्रयास करते हुए कहा था कि भारत अब सपेरों का नहीं, बल्कि माउस (कंप्यूटर) से जादू करने वाला देश है। हालांकि, इस तरह की कार्टूनबाजी यह दर्शाती है कि पश्चिमी मीडिया के एक वर्ग में भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति के प्रति अभी भी पूर्वाग्रह बना हुआ है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

वियतनाम पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: रक्षा साझेदारी और तकनीक पर बढ़ा भारत का दबदबा

Story 1

बादामी गुफा मंदिर में बवाल: ASI स्टाफ पर जूते पहनकर घूमने का आरोप, वीडियो वायरल

Story 1

6.5 फीट का तूफान टीम इंडिया में: कौन हैं गुरनूर बरार, जिन्होंने अपनी रफ्तार से हिला दी है क्रिकेट की दुनिया?

Story 1

ट्विशा शर्मा मौत मामला: सिस्टम से लड़ रहे हैं - परिवार ने खोला मोर्चा, सास के दावों को नकारा

Story 1

IND vs AFG: शुभमन गिल को मिली कमान, ऋषभ पंत से छिनी उपकप्तानी; अफगानिस्तान सीरीज के लिए नई टीम का ऐलान

Story 1

डिजायनर पत्रकारों को मिला ग्लोबल लीडर : भारत को नीचा दिखाने के पीछे छिपी है एक अंतरराष्ट्रीय साजिश?

Story 1

राहुल गांधी की झंडा चूक: अडानी पर निशाना साधने के चक्कर में खुद हुए ट्रोल

Story 1

बड़े मंगल पर सियासी दर्शन : मंदिर और भंडारे के जरिए क्या संदेश दे रहे हैं राहुल-अखिलेश?

Story 1

गोल्ड मेडलिस्ट, IIM के छात्र और कूटनीति के माहिर: कौन हैं सिबी जॉर्ज, जिन्होंने नॉर्वे में भारत का पक्ष रखा?

Story 1

अफगानिस्तान के खिलाफ बिगुल: टीम इंडिया का ऐलान, रोहित-विराट की वापसी और कई नए सितारों को मौका