गाजियाबाद: रेप के आरोपी का विजय जुलूस , जेल से निकलते ही फूल-मालाओं से हुआ भव्य स्वागत
News Image

गाजियाबाद से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। एक लॉ छात्रा से रेप के आरोपी सुशील प्रजापति को जब जेल से जमानत मिली, तो बाहर उसका स्वागत किसी नायक की तरह किया गया। समर्थकों ने न केवल उसे फूलों से लाद दिया, बल्कि कंधों पर बैठाकर शक्ति प्रदर्शन भी किया।

जमानत मिलते ही निकला विजय जुलूस आरोपी सुशील प्रजापति करीब नौ महीने जेल में रहने के बाद 17 मई को बाहर आया। जेल के बाहर पहुंचते ही उसके समर्थकों ने दर्जनों गाड़ियों का काफिला निकाला। वायरल वीडियो में आरोपी सफेद कपड़ों में माला पहने नजर आ रहा है, जबकि समर्थक उसके पैर छूते और नारे लगाते दिख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को विजय जुलूस की तरह पेश किया गया, जिसने कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? पीड़िता एक लॉ स्टूडेंट है। आरोप है कि आरोपी ने उसे एक वकील से मिलवाने के बहाने अपने फ्लैट पर बुलाया था, जहां उसने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि 17 मई को उसे अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन रिहाई के बाद सार्वजनिक रूप से उसका महिमामंडन करने को लेकर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का आक्रोश इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। यूजर्स का कहना है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को इस तरह से सम्मानित करना पीड़िता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसे दृश्य न्याय व्यवस्था में आम जनता के भरोसे को कमजोर करते हैं और अपराधियों को बढ़ावा देते हैं।

पुलिस की जांच और कानूनी पहलू इस मामले पर पुलिस ने संज्ञान लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या जुलूस निकालने और गाड़ियों का काफिला ले जाने के लिए प्रशासन से अनुमति ली गई थी या नहीं। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

जमानत का मतलब निर्दोष होना नहीं कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जमानत मिलना केवल एक कानूनी प्रक्रिया है, यह आरोपी के निर्दोष होने का प्रमाण नहीं है। ट्रायल अभी लंबित है। ऐसे में आरोपी को एक हीरो बनाकर पेश करना न केवल सामाजिक जिम्मेदारी का अभाव दर्शाता है, बल्कि यह उस मानसिकता पर भी सवाल खड़े करता है, जहां अपराध की गंभीरता से ऊपर शक्ति प्रदर्शन को रखा जाता है। अब सबकी निगाहें कोर्ट केस और पुलिस की जांच पर टिकी हैं।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

जुगाड़ का ऐसा नमूना नहीं देखा होगा: पंचर ढूंढने के लिए अपनाई गजब की तकनीक

Story 1

दिल्ली में अब खंडित मूर्तियों का होगा सम्मानजनक निपटान, सरकार बनाएगी खास कलेक्शन सेंटर

Story 1

नार्वे में पीएम मोदी पर अपमानजनक कार्टून: सपेरे के रूप में चित्रण, भारत विरोधी मानसिकता उजागर

Story 1

बांद्रा ईस्ट में रेलवे का महा-अभियान : गरीब नवाज़ की 4 मंजिला अवैध इमारतों पर चला बुलडोजर

Story 1

समिट में संबंध शब्द का जादू: पीएम मोदी की बात सुनकर क्यों मुस्कुरा उठीं आइसलैंड की प्रधानमंत्री?

Story 1

IND vs AFG: टीम इंडिया में बड़ा बदलाव, शुभमन गिल संभालेंगे कमान; रोहित-हार्दिक की फिटनेस पर पेंच!

Story 1

कांगो में इबोला का बुंडीबुग्यो वेरिएंट बेकाबू, 131 लोगों की मौत; WHO ने घोषित की इमरजेंसी

Story 1

8th Pay Commission: पुरानी पेंशन योजना पर बड़ा फैसला, अनुकंपा पर नियुक्त कर्मचारियों की चमकी किस्मत

Story 1

वियतनाम पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: रक्षा साझेदारी और तकनीक पर बढ़ा भारत का दबदबा

Story 1

BHU का विवादित सवाल और NEET पेपर लीक: अखिलेश यादव ने बीजेपी को घेरा