चिकन नेक पर सुवेंदु अधिकारी का बड़ा दांव: केंद्र को सौंपी 120 एकड़ जमीन, पूर्वोत्तर की सुरक्षा हुई अभेद्य
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सिलीगुड़ी कॉरिडोर का सामरिक महत्व भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश की मुख्य भूमि से जोड़ने वाला चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) अब और अधिक सुरक्षित होने जा रहा है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए सिलीगुड़ी कॉरिडोर में करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंप दी है। यह क्षेत्र 20-22 किलोमीटर चौड़ा है, जो भारत की सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

अटकलों पर लगा विराम, केंद्र को मिला कंट्रोल पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से नेशनल हाइवे के सात महत्वपूर्ण हिस्सों को अब केंद्र के अधीन कर दिया गया है। ये जमीनें लंबे समय से स्टेट पीडब्ल्यूडी के पास थीं और केंद्र की बार-बार की मांग के बावजूद एक साल से अधिक समय से लंबित थीं। अब इस जमीन के हस्तांतरण के बाद नेशनल हाइवे अथॉरिटी (NHAI) और नेशनल हाइवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NHIDCL) के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है।

क्यों अहम है यह फैसला? सिलीगुड़ी कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब स्थित है। हाल के दिनों में बांग्लादेश में हुई राजनीतिक उठापटक और वहां की कट्टरपंथी ताकतों द्वारा कॉरिडोर को लेकर दिए गए बयानों के बाद केंद्र सरकार इस इलाके की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क है। सुवेंदु सरकार के इस कदम से न केवल सैन्य लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे, बल्कि रक्षा तैयारियों और सीमा बाड़ लगाने के काम में भी तेजी आएगी।

इन क्षेत्रों पर होगा सीधा प्रभाव इस हस्तांतरण के बाद एनएच-31, एनएच-10 और एनएच-33 जैसे महत्वपूर्ण राजमार्गों के विस्तार कार्य में तेजी आएगी। इसमें बिहार-बंगाल सीमा से गाजोल तक, सिक्किम बॉर्डर रूट, और भारत-भूटान সীমান্ত के पास हासिमारा-जयगांव खंड शामिल हैं। इसके अलावा, मालदा और मुर्शिदाबाद होते हुए बिहार तक की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

सुवेंदु सरकार की नई दिशा पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया है। जानकारों का मानना है कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी आसान होगी और चीन की नजदीकी सीमा पर भारत की सामरिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। इस फैसले को सुवेंदु के नेतृत्व में बंगाल की बदलती प्रशासनिक नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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