पुणे पोर्श कांड: सिस्टम बिक चुका है, धीरे-धीरे सब छूट रहे , बेटे को खोने वाली मां की न्याय के लिए गुहार
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पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस को दो साल बीतने को हैं, लेकिन अनीश अवधिया की मां सविता अवधिया का जख्म आज भी ताजा है। अपने 24 वर्षीय इंजीनियर बेटे को खोने वाली एक मां का दर्द अब आक्रोश में बदल गया है। उनका आरोप है कि पैसे और रसूख के दम पर आरोपी पक्ष कानून से खिलवाड़ कर रहा है।

सबको मिल रही जमानत, सिस्टम पूरी तरह भ्रष्ट सविता अवधिया ने सिस्टम पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले में शामिल आरोपियों को एक-एक करके जमानत मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल ने मामले की शुरुआत से ही पैसे खिलाकर सबूतों और गवाहों को प्रभावित किया है। उन्होंने सीधे तौर पर न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

ब्लड सैंपल से लेकर जमानत तक, सब सेटिंग सविता का कहना है कि आरोपी के पिता ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर ब्लड सैंपल बदलवाए और पुलिस को भी मैनेज किया। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है जैसे नए जज को भी शायद पैसे खिला दिए गए हैं। उनका मानना है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी आरोपियों का आसानी से छूट जाना व्यवस्था की विफलता है।

बेटे की बरसी पर न्याय का इंतजार 19 मई 2024 को पुणे में एक 17 वर्षीय नाबालिग ने नशे में धुत होकर अपनी पोर्श कार से अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा को कुचल दिया था। अनीश की मां का कहना है कि इसी महीने बेटे की बरसी है, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उन्हें केवल निराशा हाथ लग रही है। उन्होंने कहा कि अगर यह मामूली चोट का मामला होता तो शायद वे खामोश रहतीं, लेकिन उन्होंने अपना बेटा खोया है।

नाबालिग होने का ढोंग और कानून की मांग सविता अवधिया ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि जब बच्चे को पब में शराब पीने और महंगी गाड़ी चलाने की आजादी दी जाती है, तब उसे बड़ा माना जाता है, लेकिन अपराध करने के बाद उसे नाबालिग बताकर बचाया जाता है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे मामलों के लिए कड़े कानून बनाए जाएं ताकि रसूखदार लोग अपने बच्चों को बेलगाम न छोड़ें।

क्या है घटना? 19 मई 2024 को पुणे की सड़कों पर मध्य प्रदेश के दो युवा इंजीनियरों- अनीश और अश्विनी को एक नाबालिग ने अपनी लग्जरी कार से रौंद दिया था। घटना के बाद आरोपी के परिवार पर सबूत मिटाने और पुलिस को घूस देने के गंभीर आरोप लगे थे। दो साल बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की दहलीज पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।

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