सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपनी गाइडलाइंस को और अधिक कड़ा कर दिया है। अदालत ने अपने पिछले आदेशों को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी, वैक्सीनेशन और उन्हें सार्वजनिक स्थानों से हटाकर शेल्टर होम में भेजना अनिवार्य है।
मेनका गांधी ने खोली अव्यवस्था की पोल पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब इस मामले में कोई सुनवाई नहीं होगी। जो भी असंतुष्ट है, वह हाईकोर्ट जा सकता है। उन्होंने अफसोस जताया कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों से कुत्तों को हटाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
अमीर से गरीब कालोनी का क्रूर खेल मेनका गांधी ने एक गंभीर खुलासा करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों के लिए बनाए गए एबीसी सेंटर (नसबंदी केंद्र) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रसूखदार लोग अपनी कॉलोनियों से कुत्तों को उठवाकर गरीब बस्तियों में फेंक देते हैं। नतीजा यह होता है कि गरीब लोग इन कुत्तों का शिकार बनते हैं। उन्होंने मांग की कि एबीसी सेंटर्स का प्रबंधन सही तरीके से और पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
क्या कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश? सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के आतंक से मुक्त जीवन को जीवन जीने के अधिकार (अनुच्छेद 21) से जोड़ा है। कोर्ट ने कहा है कि स्कूल, अस्पताल, सड़क और एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बच्चे, बुजुर्ग और आम नागरिक बिना किसी डर के आ-जा सकें। पागल और बीमार कुत्तों के लिए कानूनी दायरे में दया मृत्यु का प्रावधान भी बरकरार रखा गया है।
पुलिस सुरक्षा और एजेंसियों को कानूनी संरक्षण अदालत ने नगर निगम और अन्य एजेंसियों के कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी डर के अपना काम करें। कुत्तों को पकड़ने या नसबंदी के काम में लगे कर्मचारियों को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। साथ ही, ड्यूटी के दौरान उन पर कोई एफआईआर या कानूनी कार्यवाही नहीं होगी।
शेल्टर होम्स का सच आदेश के बावजूद दिल्ली समेत देश के 780 जिलों में एक भी नया शेल्टर होम नहीं बन पाने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। रेलवे, अस्पताल और अन्य संस्थानों ने इस काम में अपनी विवशता जाहिर की थी, जिसे अदालत ने अब खारिज कर दिया है। अब यह राज्य सरकारों और नगर निकायों की जिम्मेदारी है कि वे आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित आश्रयों में शिफ्ट करें।
#WATCH दिल्ली: पशु अधिकार कार्यकर्ता और भाजपा नेता मेनका गांधी ने कहा, उन्होंने कहा है कि अब हम नहीं सुनेंगे और अगर आपको हमारे फैसले से कोई ऐतराज है तो आप हाई कोर्ट जा सकते हैं। इन्होंने पिछले ऑर्डर में बहुत सख्ती से कहा था कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और बस स्टॉप से आवारा… https://t.co/2LMxrNU7n1 pic.twitter.com/cw0b6eVt3F
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 19, 2026
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