विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को भारत में प्रेस की आजादी और मानवाधिकारों पर उठ रहे विदेशी सवालों का बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। ओस्लो में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने नॉर्वे के पत्रकारों को आईना दिखाया।
बिना समझे सवाल पूछना बंद करें सिबी जॉर्ज ने उन रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें भारत की छवि खराब करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि कई लोग कुछ अज्ञानी और नासमझ गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की रिपोर्ट्स को पढ़कर भारत के बारे में राय बना लेते हैं। उन्होंने साफ कहा कि इन लोगों को भारत के विशाल लोकतांत्रिक ढांचे की कोई समझ ही नहीं है।
दिल्ली में ही हैं 200 टीवी चैनल भारत में मीडिया की स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए जॉर्ज ने कहा, लोगों को हमारे मीडिया तंत्र की व्यापकता का अंदाजा ही नहीं है। सिर्फ दिल्ली में ही हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में कम से कम 200 टीवी चैनल हैं। हर शाम यहां ब्रेकिंग न्यूज की बाढ़ आ जाती है, जो हमारे मीडिया की सक्रियता का सबूत है।
लोकतंत्र का सबसे बड़ा प्रमाण: सरकार बदलना सचिव ने जोर देकर कहा कि भारत समानता और मानवाधिकारों में गहरी आस्था रखता है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का सबसे बड़ा प्रमाण जनता का वह अधिकार है, जिसके जरिए वे किसी भी सरकार को चुन सकते हैं या बदल सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 1947 में अपनी आजादी के साथ ही महिलाओं को समान मताधिकार दे दिया था, जबकि कई विकसित देशों को वहां तक पहुंचने में दशकों लग गए।
संविधान में निहित मौलिक अधिकार उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान अपने नागरिकों को मौलिक अधिकारों की पूरी गारंटी देता है। देश में यदि कहीं अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति आती है, तो कानून उसके लिए पुख्ता उपाय भी करता है। सिबी जॉर्ज ने गर्व से कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां मीडिया के पास स्वतंत्र रूप से काम करने की पूरी आजादी है और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
#WATCH | Oslo, Norway | MEA Secretary (West) Sibi George responds to question by reporters from Norway - Why should we trust you? Will the PM take critical questions from the Indian Press? pic.twitter.com/iaEGIlVG08
— ANI (@ANI) May 18, 2026
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