प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की भूमिका को एक नई ऊंचाई दी है। पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी ने उन देशों का दौरा किया है, जहां दशकों से कोई भारतीय प्रधानमंत्री नहीं पहुंचा था। इस सक्रिय कूटनीति का सीधा असर भारत के वैश्विक दबदबे और रणनीतिक साझेदारी पर पड़ा है।
इतिहास रचते दौरे: जहां कोई नहीं गया पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे देशों में पहुंचकर इतिहास रचा, जहां पहले कोई भारतीय प्रधानमंत्री नहीं गया था। इसमें 2025 में क्रोएशिया और 2017 में इजरायल की यात्रा शामिल है। इजरायल दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले गया। वहीं, 2023 में पापुआ न्यू गिनी जाकर उन्होंने प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत के जुड़ाव को नई दिशा दी।
दशकों पुराने कूटनीतिक सन्नाटे को तोड़ा भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पीएम मोदी ने उन देशों के साथ संबंधों को फिर से जीवंत किया है जहां दशकों से उच्च-स्तरीय संवाद ठप थे। इसमें 43 साल बाद नॉर्वे (2026), 45 साल बाद पोलैंड (2024), 41 साल बाद ऑस्ट्रिया (2024), 40 साल बाद ग्रीस (2023) और 23 साल बाद साइप्रस (2025) की यात्राएं प्रमुख हैं।
अफ्रीका और मध्य पूर्व में नई रणनीतिक पहुंच ग्लोबल साउथ और मध्य पूर्व में भारत की पैठ पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। 56 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद गुयाना (2024) की यात्रा ने लैटिन अमेरिका के साथ संबंधों को नया आधार दिया। इसके अलावा नाइजीरिया (17 साल बाद), मिस्र (26 साल बाद) और युगांडा (21 साल बाद) का दौरा यह दर्शाता है कि भारत विकासशील देशों के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
वैश्विक महाशक्तियों के साथ भरोसे का रिश्ता पीएम मोदी ने उन देशों के साथ भी संवाद को फिर से बहाल किया, जो वैश्विक राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनमें 60 साल बाद आयरलैंड (2015), 42 साल बाद कनाडा (2015), 34 साल बाद यूएई (2015) और 28 साल बाद ऑस्ट्रेलिया (2014) की ऐतिहासिक यात्राएं शामिल हैं। ये दौरे केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रक्षा, तकनीक, व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं।
भारत की बढ़ती कूटनीतिक साख इन विदेश यात्राओं का मुख्य उद्देश्य भारत को एक विश्व मित्र के रूप में स्थापित करना है। कई दशकों के अंतराल को खत्म कर पीएम मोदी ने यह सिद्ध किया है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सक्रिय और तत्पर है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन दौरों से न केवल व्यापारिक संबंध सुधरे हैं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और नीति निर्धारण में भारत की आवाज और भी अधिक मुखर हुई है।
प्रधानमंत्री @narendramodi की ऐतिहासिक विदेश यात्राओं ने वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान बनाई। 🇮🇳🌍
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) May 18, 2026
क्रोएशिया और इज़राइल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने से लेकर कई देशों के साथ दशकों पुराने कूटनीतिक अंतराल को समाप्त करने तक, भारत ने दुनिया के साथ अपने संबंधों… pic.twitter.com/H44lQkfjGK
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