देश संविधान से चलेगा, आपकी धमकियों से नहीं : सड़कों पर नमाज विवाद पर वारिस पठान का योगी सरकार पर तीखा हमला
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर नमाज को लेकर दिए गए सख्त बयानों ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि सड़कों पर नमाज के नाम पर अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने इस पर पलटवार करते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया है।

धमकियां देना मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता वारिस पठान ने मुख्यमंत्री के बयानों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पठान ने सीएम पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या वे अपनी धमकियों से देश चलाना चाहते हैं? उन्होंने कहा, देश संविधान और कानून से चलता है, किसी की व्यक्तिगत धमकियों से नहीं।

मजबूरी में सड़क पर नमाज की दलील सड़क पर नमाज के मुद्दे पर पठान ने सफाई देते हुए कहा कि किसी को धूप या बारिश में सड़क पर नमाज पढ़ने का शौक नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि मस्जिदों में जगह की कमी होने के कारण लोग चंद मिनटों के लिए मजबूरी में सड़क का रुख करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हिंदू भाई ट्रेन या एयरपोर्ट पर प्रार्थना या भजन करते हैं, तो उस पर कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई जाती?

सबका साथ, सबका विकास पर सवाल एआईएमआईएम नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में दखल देने की अपील की है। पठान ने पूछा कि क्या यही सबका साथ, सबका विकास का मॉडल है? उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर नफरत फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, न कि केवल मुसलमानों के लिए एक अलग मापदंड।

कांवड़ यात्रा का दिया उदाहरण पठान ने कांवड़ यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जब कांवड़ यात्रा निकलती है, तब मुस्लिम समुदाय कभी कोई आपत्ति नहीं जताता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में उनका भी वही अधिकार है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है। पठान ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन प्रशासन का रुख एकतरफा नहीं होना चाहिए।

क्या है योगी सरकार का स्टैंड? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख स्पष्ट है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सड़कों को रोककर किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन स्वीकार्य नहीं होगा। सीएम ने सुझाव दिया है कि नमाज को शिफ्ट में पढ़ा जाए या अपने घरों के भीतर अदा किया जाए। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ से आम नागरिकों को असुविधा होती है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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