पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का टेंशन वाला जवाब: क्या फिर बढ़ेंगे दाम?
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मिडल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच आम आदमी की जेब पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। लोग यह जानने को बेताब हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब कम होंगी या फिर कब और बढ़ेंगी? हालांकि, केंद्र सरकार के रुख ने आम जनता की चिंता और बढ़ा दी है।

कीमतों पर अनिश्चितता बरकरार सोमवार को एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ कर दिया कि फिलहाल कीमतों में बदलाव को लेकर सरकार कोई समयसीमा या गारंटी नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन आगे दाम बढ़ेंगे या नहीं, इस पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई जा सकती।

हाल ही में हुई है बड़ी बढ़ोतरी गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को ही सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इसके साथ ही सीएनजी के दाम भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए गए हैं।

स्टॉक पर्याप्त है, घबराएं नहीं सरकार ने जनता को आश्वस्त करने की कोशिश करते हुए कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। मंत्रालय का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बावजूद भारतीय रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं। उपभोक्ताओं और वितरकों को पैनिक करने की जरूरत नहीं है, आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है।

कंपनियों पर भारी दबाव, और बढ़ सकती हैं कीमतें? भले ही सरकार ने हाल ही में दाम बढ़ाए हैं, लेकिन तेल विपणन कंपनियां अभी भी भारी घाटे का सामना कर रही हैं। विश्लेषक फर्म नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, 3 रुपये की बढ़ोतरी कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए नाकाफी है। रिपोर्ट का अनुमान है कि मुनाफे की स्थिति में आने के लिए तेल कंपनियों को प्रति लीटर करीब 25 रुपये तक की और बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है।

एलपीजी घाटा 440 करोड़ के पार संकट केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर एलपीजी की कीमतें 520 डॉलर से बढ़कर 1000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं। इसके चलते सरकारी तेल कंपनियों का दैनिक एलपीजी घाटा करीब 440 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच कंपनियों का घाटा सरकार को आगामी समय में और कड़े फैसले लेने पर मजबूर कर सकता है।

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