असीम मुनीर का सीक्रेट गेम : ईरान से तनातनी, चीन को झटका और अमेरिका से बढ़ती नजदीकी
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इस्लामाबाद: ड्रॉप साइट की हालिया रिपोर्ट और लीक हुए डिप्लोमेटिक केबल्स ने पाकिस्तान की सत्ता और सेना के गलियारों में हलचल मचा दी है। इन दस्तावेजों में मौजूदा सेना प्रमुख असीम मुनीर के उन फैसलों का खुलासा हुआ है, जिन्होंने पाकिस्तान की विदेश नीति और इमरान खान के साथ उनके संबंधों की दिशा बदल दी।

ईरान यात्रा के दौरान हुई थी तीखी बहस

साल 2019 में असीम मुनीर तत्कालीन ISI प्रमुख के तौर पर इमरान खान के साथ ईरान दौरे पर गए थे। बताया गया है कि वहां मुनीर ने ईरानी अधिकारियों के साथ बेहद आक्रामक और गैर-कूटनीतिक भाषा में बात की। बलूच इलाके में चल रहे अलगाववाद पर मुनीर के रुख ने ईरानी नेतृत्व को नाराज कर दिया। सूत्र बताते हैं कि इस व्यवहार से परेशान होकर ईरान ने इमरान खान से शिकायत की, जिसके बाद जून 2019 में मुनीर को ISI प्रमुख के पद से हटा दिया गया।

चीन को ठेंगा और परमाणु तकनीक की लालसा

लीक दस्तावेजों का सबसे चौंकाने वाला खुलासा चीन के साथ संबंधों को लेकर है। असीम मुनीर ने कथित तौर पर चीन को ग्वादर में स्थायी सैन्य अड्डा बनाने का ऑफर दिया था। इसके बदले में, मुनीर ने चीन से न्यूक्लियर ट्रायड (पनडुब्बी से परमाणु हमला करने की तकनीक) और भारत के खिलाफ एडवांस सैन्य साजो-सामान की मांग की थी। चीन ने परमाणु तकनीक देने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद से पाकिस्तान और चीन के संबंधों में दरार आ गई।

CPEC की रफ्तार धीमी होने के पीछे का सच

असीम मुनीर के आने के बाद से ही CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) की परियोजनाओं पर ब्रेक लग गया है। 90 में से केवल 38 परियोजनाएं ही पूरी हो पाई हैं। चीन अब पाकिस्तान को नई फंडिंग देने से कतरा रहा है और चीनी राजदूत भी सार्वजनिक रूप से चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठा चुके हैं। जानकारों का मानना है कि मुनीर ने चीन की सुरक्षा मांगों को जानबूझकर नजरअंदाज किया ताकि अमेरिका के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर सकें।

अमेरिका की ओर झुकाव और इमरान खान का पतन

असीम मुनीर की रणनीति स्पष्ट थी—चीन को दरकिनार कर अमेरिका के साथ तालमेल बिठाना। अगस्त 2025 में मुनीर का यह बयान कि हम एक दोस्त के लिए दूसरे दोस्त की कुर्बानी नहीं देंगे , महज एक दिखावा था। वास्तव में, उन्होंने चीन के साथ आर्थिक निर्भरता वाले CPEC के दूसरे चरण को कमजोर किया।

इन्हीं कूटनीतिक पैंतरों और अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकियों ने उन्हें वाशिंगटन के लिए उपयोगी बना दिया। इमरान खान को सत्ता से बेदखल करने और फिर जेल भिजवाने के पीछे भी इसी लंदन प्लान और सैन्य नेतृत्व की नई प्राथमिकताओं को बड़ी वजह माना जा रहा है। अब इन रहस्यों के लीक होने से रावलपिंडी की मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं।

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