कानून हम तय करेंगे : वी.डी. सतीशन के मुख्यमंत्री बनते ही मुस्लिम लीग के नारों से केरल की राजनीति में भूचाल
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केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों के 10 दिन बाद कांग्रेस ने वी.डी. सतीशन को नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है। सतीशन के नाम पर मुहर लगते ही प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के कार्यकर्ताओं ने इडुक्की में एक विजय जुलूस निकाला, जिसमें लगाए गए नारों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।

कानून हम बनाएंगे का उकसावे वाला नारा जुलूस के दौरान कार्यकर्ताओं ने विवादित नारे लगाए। समर्थकों ने चिल्लाते हुए कहा, केरल की धरती पर जहां लीग का शासन है, वहां कानून हम तय करते हैं। इस नारे ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सत्ता के संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जातिगत नेताओं को बनाया निशाना नारेबाजी यहीं नहीं रुकी। जुलूस में शामिल लोगों ने केरल के दो प्रभावशाली जातिगत संगठनों के प्रमुखों—नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) के सुकुमारन नायर और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के वेल्लापल्ली नटेशन—को खुलेआम चुनौती दी। समर्थकों ने चिल्लाते हुए कहा, कौन हैं ये वेल्लापल्ली और सुकुमारन? ध्यान से देखो, यह लीग है।

बदले की राजनीति का अंदेशा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नारेबाजी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। चुनाव के दौरान इन दोनों नेताओं ने मुस्लिम लीग की खुलकर आलोचना की थी। सतीशन के चयन से पहले भी इन संगठनों ने असहमति जताई थी। अब लीग का यह आक्रामक रुख इसे एक प्रतिशोध के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस की बढ़ी मुश्किल, विपक्ष का जोरदार हमला हालात को बेकाबू होते देख मुस्लिम यूथ लीग ने अपनी इडुक्की जिला समिति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि, बीजेपी और माकपा (CPI-M) ने इसे मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस को घेर लिया है।

बीजेपी के केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि सतीशन का मुख्यमंत्री बनना केवल मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव का नतीजा है। बीजेपी का दावा है कि आने वाले पांच साल तक केरल की सत्ता परदे के पीछे से मुस्लिम लीग ही चलाएगी।

क्या कांग्रेस अपनी साख बचा पाएगी? 140 सदस्यीय विधानसभा में 22 विधायकों के साथ मुस्लिम लीग UDF का दूसरा सबसे बड़ा दल है। सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले में लीग की अहम भूमिका मानी जा रही है। अब चुनौती यह है कि नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री इस विवाद और अपने सहयोगियों के इस उग्र व्यवहार को कैसे नियंत्रित करते हैं, क्योंकि केरल की राजनीति में जातिगत समीकरण हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहे हैं।

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