ईरान के ड्रोन हमलों का काल बना UAE, तेल टैंकों पर तैनात किए लोहे के पिंजरे
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी ऊर्जा संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए एक सख्त सुरक्षा रणनीति अपनाई है। दुबई के पास स्थित तेल भंडारण टैंकों को अब कोप केज (Cope Cage) यानी भारी लोहे के जालीदार ढांचे से ढक दिया गया है।

यह तकनीक मुख्य रूप से उन ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए है, जो पिछले कुछ समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं।

क्या हैं ये कोप केज और कैसे करते हैं काम? ये लोहे के ढांचे कोई मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं हैं, बल्कि एक फिजिकल सुरक्षा परत हैं। इनका काम ड्रोन को टैंक की मुख्य सतह से टकराने से पहले ही धमाका करने के लिए मजबूर करना है।

यह वही तकनीक है जिसे यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस ने अपने सैन्य टैंकों और तेल डिपो को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। ये ढांचे खासतौर पर ईरान के शाहेद-136 जैसे आत्मघाती ड्रोन्स के प्रभाव को कम करने में प्रभावी साबित हो रहे हैं।

युद्ध की मार से सबक UAE का यह कदम मजबूरी और अनुभव का परिणाम है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश की वायु रक्षा प्रणाली ने अब तक 551 बैलिस्टिक मिसाइलें, 29 क्रूज मिसाइलें और 2,265 ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया है।

इतनी सुरक्षा के बावजूद, हबशन गैस प्लांट और फुजैराह पोर्ट जैसे महत्वपूर्ण ठिकाने हमलों की चपेट में आ गए। हबशन प्लांट को हुए नुकसान की भरपाई में अभी भी काफी समय लगने की उम्मीद है, जिसने देश को अपनी सुरक्षा नीति फिर से लिखने पर मजबूर कर दिया है।

अस्थिर हालात, बढ़ती चिंता सीजफायर के दावों के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होता नहीं दिख रहा। 10 मई को हुए ताजा हमले ने यह साबित कर दिया है कि ईरान समर्थित ड्रोन खतरा अभी भी टला नहीं है।

यही कारण है कि अब सिर्फ रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय, UAE ने फिजिकल सुरक्षा उपायों—जैसे जाल, केबल और मेटल कवरिंग—को भी अपने डिफेंस नेटवर्क का अहम हिस्सा बना लिया है। यह बदलाव दर्शाता है कि भविष्य के युद्धों में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए लोहे की दीवार कितनी जरूरी हो गई है।

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