जमीन पर उतरिए, कार्यकर्ताओं के रक्षक बनिए : TMC सांसदों को ममता बनर्जी का कड़ा संदेश
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पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद मचे सियासी घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। पार्टी मुख्यालय में सांसदों के साथ हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में ममता ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अब सांसदों को फील्ड में उतरना होगा और कार्यकर्ताओं का ढाल बनना होगा।

जनसंवाद और दफ्तरों को फिर से खोलने का आदेश बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने सांसदों से कहा कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में जाकर जनता से सीधा संवाद बढ़ाएं। उन्होंने पार्टी दफ्तरों के ताले खोलने और बंद पड़े कार्यालयों को फिर से सुचारू रूप से शुरू करने की नसीहत दी। ममता ने साफ किया कि हार से घबराने की जरूरत नहीं है, संघर्ष अभी जारी रहेगा।

हाईकोर्ट के बाद एक्शन मोड में TMC यह बैठक कलकत्ता हाईकोर्ट में ममता बनर्जी की पेशी के तुरंत बाद हुई। दरअसल, चुनाव के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों और उनके घरों से विस्थापन को लेकर पार्टी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। कोर्ट से निकलने के बाद सांसदों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि कानून का सम्मान करते हुए वे कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

यूसुफ पठान और शताब्दी रॉय का बयान बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान ने कोर्ट के आदेश का पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, अदालत ने कहा है कि लोगों को सुरक्षित घर वापस जाना चाहिए और पार्टी कार्यालय फिर से खुलने चाहिए। वहीं, सांसद शताब्दी रॉय ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों के घर और दुकानें तोड़ी गई हैं, उन्हें वापस बसाना पुलिस की जिम्मेदारी है।

हम हारे नहीं, हमें हराया गया है बैठक से बाहर निकले सांसदों के सुर काफी तल्ख थे। सायोनी घोष ने दावा किया कि यह जनादेश नहीं बल्कि वोटों की लूट है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को साजिश के तहत हराया गया है और जनता इसका जवाब आने वाले चुनावों में देगी। वहीं, सुदीप बंद्योपाध्याय ने आरोप लगाया कि गिनती के दौरान उनके पहचान पत्र तक फाड़ दिए गए और भारी धांधली हुई।

सांसदों को ग्राउंड जीरो पर रहने की हिदायत शत्रुघ्न सिन्हा ने स्पष्ट किया कि पूरी पार्टी एकजुट है और इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर इस लड़ाई को जारी रखा जाएगा। ममता बनर्जी का सीधा संदेश है कि अब सांसदों को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि बंगाल की जमीनी राजनीति में सक्रिय होकर कार्यकर्ताओं को सुरक्षा का भरोसा देना है। ममता का यह रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बंगाल में राजनीतिक टकराव और बढ़ने वाला है।

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