तेजी से बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली के बीच मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने पर्यावरण संरक्षण में एक बड़ा कदम उठाया है। शहर के अशोक गार्डन स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क में देश का पहला एल्गी ट्री (Algae Tree) लगाया गया है। सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी यह तकनीक न केवल भविष्य की स्मार्ट ग्रीन टेक्नोलॉजी मानी जा रही है, बल्कि शहरों की दम घोंटती हवा को साफ करने का एक नया जरिया भी है।
नाम से यह भले ही पेड़ लगे, लेकिन असल में यह एक हाईटेक मशीन है। यह एक पारदर्शी टैंक की तरह दिखता है, जिसके अंदर पानी और माइक्रो-एल्गी (शैवाल) मौजूद रहते हैं। यह मशीन सक्रिय रूप से आसपास की प्रदूषित हवा को अंदर खींचती है और फोटो-बायोरिएक्टर तकनीक की मदद से कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलकर बाहर छोड़ती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एक एल्गी ट्री की क्षमता लगभग 20 से 25 बड़े पेड़ों के बराबर है। यह एक साल में करीब 1.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड सोख सकता है। यही कारण है कि इसे उन शहरी इलाकों के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है, जहां कंक्रीट के जंगलों के कारण पेड़ लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है।
यह मशीन फोटो-संश्लेषण (Photosynthesis) की प्राकृतिक प्रक्रिया को एक नियंत्रित वातावरण में अंजाम देती है। इसमें लगे सेंसर और माइक्रो-एल्गी सूरज की रोशनी का उपयोग करके हवा को शुद्ध करते हैं। सबसे खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं पड़ती; इसके ऊपर सोलर पैनल लगे हैं, जो पंप और एलईडी सिस्टम को ऊर्जा देते हैं। रात के समय यह बैटरी बैकअप के जरिए अपना काम जारी रखता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस तकनीक को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मॉल और भारी ट्रैफिक वाले चौराहों पर लगाना सबसे अधिक प्रभावी होगा। जहां बड़े पेड़ लगाना मुश्किल है, वहां यह मशीन हवा की गुणवत्ता को सुधारने में बेहतरीन परिणाम दे सकती है।
साफ जवाब है—नहीं। पर्यावरणविदों का कहना है कि एल्गी ट्री को केवल एक सपोर्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में देखा जाना चाहिए। असली पेड़ न केवल ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि वे जैव विविधता को बनाए रखते हैं, जमीन का तापमान कम करते हैं और मिट्टी को थामे रखते हैं। यह मशीन प्राकृतिक पेड़ों का विकल्प नहीं, बल्कि शहरों में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए एक आधुनिक पूरक उपाय है।
भोपाल में शुरू हुआ यह प्रयोग यदि सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य बड़े शहरों में भी इस तरह के स्मार्ट ऑक्सीजन प्लांट नजर आ सकते हैं। यह तकनीक आने वाले सस्टेनेबल सिटी मॉडल की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।
*India’s first Algae Tree has been installed in Bhopal. Is this the future?
— ViralDecoded (@ViralDecoded) May 12, 2026
Bhopal recently got India’s first “Algae Tree” installed at Swami Vivekananda Park, Ashoka Garden. The project claims the setup can absorb CO₂ and generate oxygen equivalent to around 25 trees, while… pic.twitter.com/EZOuZlNLWC
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