प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा खपत कम करने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद देश में बहस छिड़ गई है। जहां सरकार इसे अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का कदम बता रही है, वहीं उद्योग जगत के दिग्गजों ने आने वाले कठिन समय को लेकर आगाह किया है।
ऊर्जा सुरक्षा: मंत्री का भरोसा, उद्योगपतियों की चिंता केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास कच्चे तेल का 60 दिन और एलपीजी का 45 दिन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने में सफल रही है।
हालांकि, कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने सीआईआई के सम्मेलन में एक कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्ष का असर अभी तक उपभोक्ताओं ने पूरी तरह नहीं झेला है। कोटक के अनुसार, झटका आने वाला है और यह बड़ा होगा। सीमित आय वाले लोगों के लिए ईंधन और उससे जुड़े उत्पादों की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती साबित होंगी।
आर्थिक चुनौतियों से नहीं बच सकते : सुनील मित्तल सुनील भारती मित्तल ने भी स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने माना कि मिडिल ईस्ट का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर भी पड़ना तय है। मित्तल ने उद्योग जगत से अपील की कि वे सोने के प्रति अपने जुनून को कम करें और ऊर्जा दक्षता के साथ-साथ देश में निवेश (CAPEX) बढ़ाने पर ध्यान दें।
सोना: संस्कृति बनाम विदेशी मुद्रा पीएम मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया था। इस पर उद्योग जगत की राय बंटी हुई है। जहां ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के राजेश रोकड़े ने निवेश के लिए सोना खरीदने पर रोक का स्वागत किया है, वहीं उन्होंने चेताया कि ज्वेलरी पर पूरी तरह प्रतिबंध से जीडीपी और रोजगार पर गहरा असर पड़ सकता है।
आयात पर निर्भरता कैसे घटेगी? सेनको गोल्ड के एमडी सुवांकर सेन का मानना है कि केवल मांग घटाने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में घरों और मंदिरों में पड़ा करीब 20,000 टन सोना अर्थव्यवस्था में लाने के तरीके खोजने चाहिए। उन्होंने कहा, आयात बिल को नियंत्रित करने के लिए हमें निवेश के रूप में सोने की जगह अन्य विकल्पों को प्रोत्साहन देना होगा।
निष्कर्ष यह है कि सरकार और उद्योग जगत दोनों ही मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता को लेकर चिंतित हैं। प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करना है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए केवल उपभोग कम करना काफी नहीं होगा, बल्कि ठोस नीतिगत बदलाव भी जरूरी हैं।
Those celebrating what they perceive to be a difficult situation for 1.4 billion Indians and the nation’s energy sector should introspect.
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) May 12, 2026
While damaging their credibility, the panic, fear and rumour mongering they have consistently indulged in, will only take them this far and… pic.twitter.com/FX3YyogVzj
नाहिद राणा की घातक रफ्तार के आगे पाकिस्तान ढेर, बांग्लादेश ने लगाया जीत का तिहरा शतक
हिमंत बिस्वा का शपथ ग्रहण: PM मोदी की मौजूदगी में सुरक्षा में बड़ी सेंध, निशाने पर कौन?
सपा प्रवक्ता का विवादित बयान: ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश, यूपी की राजनीति में मचा घमासान!
Uber डिलीवरी का खौफनाक सच: 20 हजार का पार्सल लेकर गायब हुआ ड्राइवर, फिर मांगी फिरौती
रिक्शा चालक की सबसे प्यारी सवारी : बेजुबानों के लिए बनी उम्मीद की किरण
नींद में भी असम का सपना देखते हैं सीएम हिमंता, बेटी ने खोला राज तो भावुक हुए लोग
दिल्ली में अब टोल पर नहीं रुकेगी गाड़ी: पहले बैरियर-फ्री टोल प्लाजा का उद्घाटन
कानपुर: अस्पताल में नर्स बनकर आई बच्चा चोर महिला, मां की सूझबूझ और 7 सेकंड के खेल ने बचाई जान
सनातन धर्म पर फिर गरमाई तमिलनाडु की राजनीति: क्या चाहते हैं उदयनिधि स्टालिन?
कुवैत की संप्रभुता को चुनौती: बूबियन आईलैंड पर ईरान के IRGC का ग्राउंड ऑपरेशन