इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच की सदाबहार दोस्ती में आई दरार ने दुनिया को चौंका दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान का दोहरा चेहरा बेनकाब हो गया है। एक सैटेलाइट तस्वीर ने साबित कर दिया है कि पाकिस्तान अपने एयरबेस का इस्तेमाल ईरान के सैन्य विमानों को छिपाने के लिए कर रहा था, और इस राज़ पर से पर्दा उठाने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसका सबसे करीबी दोस्त चीन है।
नूर खान एयरबेस पर पकड़ी गई चोरी जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट डेमियन साइमन द्वारा साझा की गई सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के अत्यंत संवेदनशील नूर खान एयरबेस पर एक C-130 हरक्यूलिस विमान खड़ा दिखाई दे रहा है। खास बात यह है कि इस विमान का रंग सैंड कैमॉफ्लाज यानी रेगिस्तानी भूरा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पाकिस्तानी वायुसेना अपने विमानों के लिए इस रंग का उपयोग नहीं करती, जबकि ईरानी वायुसेना (IRIAF) का यह मानक रंग है।
चीन का धोखा या ट्रंप के लिए एडवांस गिफ्ट? यह खुलासा चीन की प्रतिबंधित कंपनी मिजारविजन द्वारा जारी की गई तस्वीरों से हुआ है। सवाल यह है कि चीन ने अपने ही साथी पाकिस्तान की खुफिया जानकारी क्यों सार्वजनिक की? विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली आगामी बैठक से पहले चीन ने यह एडवांस गिफ्ट दिया है। चीन ने ट्रंप को संदेश दिया है कि वह वैश्विक खुफिया तंत्र पर मजबूत पकड़ रखता है, और बड़ी डील के लिए वह पाकिस्तान जैसे छोटे मोहरों की कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान का पार्किंग लॉट बना पाकिस्तान? इजरायली या अमेरिकी हवाई हमलों से बचने के लिए ईरान ने अपनी वायुसेना के कीमती विमानों को पाकिस्तान में पार्क करना शुरू कर दिया था। पहले यह महज एक अनुमान था, लेकिन अब इस सबूत ने पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति को नाजुक मोड़ पर खड़ा कर दिया है। चीन में सरकारी अनुमति के बिना किसी भी संवेदनशील फोटो का लीक होना नामुमकिन है, जो यह स्पष्ट करता है कि यह एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल थी।
पाकिस्तान पर लटकी विनाश की तलवार अगर यह साबित हो जाता है कि पाकिस्तान अमेरिकी तकनीक वाले अपने सैन्य अड्डों का उपयोग ईरान जैसे प्रतिबंधित देश की मदद के लिए कर रहा है, तो वाशिंगटन का गुस्सा झेलना तय है। पाकिस्तान को मिलने वाली F-16 की सैन्य सहायता और IMF से मिलने वाले आर्थिक पैकेज पर गंभीर संकट आ सकता है। फिलहाल, पाकिस्तान के रक्षा गलियारों में इस खुलासे से सन्नाटा पसरा हुआ है, जबकि चीन इस चाल के जरिए अमेरिका के साथ अपनी सौदेबाजी में बढ़त बनाने की कोशिश में है।
Based on CBS s reporting about Pakistan allegedly storing Iranian aircraft at Nur Khan Airbase, imagery shared by sanctioned Chinese firm Mizarvision in April 2026 showed a sand camo C-130 on site, if Pak does not operate this livery, whose aircraft is it - serious replies only pic.twitter.com/MLH1f56ieZ
— Damien Symon (@detresfa_) May 12, 2026
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