क्या चुनाव खत्म होते ही पैनिक का दौर शुरू? पीएम मोदी की 8 अपीलों पर छिड़ा सियासी संग्राम
News Image

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले 24 घंटों में दो बार देशवासियों से तेल और संसाधनों की बचत करने की अपील ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। पीएम ने सोना न खरीदने, विदेशी उत्पादों का कम उपयोग करने और पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने का आग्रह किया है। वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत के पास ईंधन और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

विपक्ष का हमला: चुनाव खत्म, पैनिक शुरू

सरकार की इन अपीलों को विपक्ष एक बड़े आर्थिक संकट की भूमिका के रूप में देख रहा है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पीएम इन अपीलों के जरिए भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का माहौल तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस ने इसे इलेक्शन खत्म, पैनिक शुरू का नाम दिया है।

पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दावा किया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक हफ्ते में 8 बिलियन डॉलर कम हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है।

राहुल गांधी का तीखा तंज

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा, 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को अब यह बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदें, क्या न खरीदें और कहां जाएं या न जाएं। राहुल ने आरोप लगाया कि पीएम हर बार जिम्मेदारी जनता पर डालकर खुद जवाबदेही से बचना चाहते हैं।

पीएम मोदी की 8 अपीलें और तर्क

प्रधानमंत्री ने इन अपीलों के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को मुख्य कारण बताया है। पीएम मोदी की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  1. वैश्विक संकट: कोरोना के बाद पश्चिम एशिया में छिड़ा युद्ध दशक का सबसे बड़ा संकट है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।
  2. विदेशी मुद्रा का दबाव: भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करता है। सप्लाई चेन अस्त-व्यस्त होने से आयातित उत्पादों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
  3. पेट्रोल-डीजल और बचत: तेल आयात देश के आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है। पीएम ने कार पूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और मेट्रो के इस्तेमाल पर जोर दिया है।
  4. कार्यशैली में बदलाव: पीएम ने निजी और सरकारी दफ्तरों से वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग को प्राथमिकता देने को कहा है।
  5. उपभोग पर नियंत्रण: खाने के तेल की खपत कम करने और विदेशी उत्पादों का उपयोग न्यूनतम रखने का आग्रह किया गया है।

क्या हैं इसके मायने?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह अपील वैश्विक अनिश्चितता के दौर में नागरिकों को जनभागीदारी के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास है। हालांकि, विपक्ष इसे किसी बड़े सरकारी फैसले—जैसे कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी—की पूर्व तैयारी मान रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था की दिशा क्या मोड़ लेती है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

ड्रिंक एंड ड्राइव पर लखनऊ में सर्जिकल स्ट्राइक : दो रातों में 2,654 लोग धराए, लगा 2.65 करोड़ का जुर्माना

Story 1

टिम डेविड पर गिरी IPL की गाज: अश्लील इशारा करना पड़ा भारी, कटा तगड़ा चालान

Story 1

पीएम मोदी की अपील पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी, पूछा- जब सब जनता करेगी, तो सरकार की जिम्मेदारी क्या है?

Story 1

2027 चुनाव: अब सपा पर भरोसा नहीं , शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने मुसलमानों को दी नई राह

Story 1

रिक्शा चालक की सबसे प्यारी सवारी : बेजुबानों के लिए बनी उम्मीद की किरण

Story 1

Google Translate के 20 साल: सबसे ज्यादा ट्रांसलेट होने वाला शब्द जानकर आप भी हो जाएंगे भावुक

Story 1

कमेंट्री बॉक्स में बवाल: क्रुणाल पांड्या पर बद्रीनाथ की विवादित टिप्पणी, फिर दी सफाई

Story 1

मेयर की कुर्सी पर बैठकर चीन की जासूसी: अमेरिका में पकड़ी गई चीनी एजेंट ईलिग वांग

Story 1

दिल्ली कैपिटल्स का ऐतिहासिक धमाका: धर्मशाला में 211 रनों का पीछा कर रचा इतिहास

Story 1

फाइटर जेट बेचने के लिए चीन का फर्जीवाड़ा : राफेल को गिराने का झूठा प्रोपेगेंडा, दुनिया में हो रही फजीहत