चीन के स्कूलों में माली बने 4 साल के बच्चे: किताबों से अलग श्रम को बना रहे जीवन का आधार
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सोशल मीडिया पर चीन के किंडरगार्टन स्कूलों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें 4-5 साल के नन्हे बच्चे बस्ते छोड़कर खुरपी और पानी के डिब्बे लेकर बगीचों में काम करते दिख रहे हैं। ये बच्चे बड़े सलीके से सब्जियां उगा रहे हैं, मिट्टी खोद रहे हैं और पौधों की देखभाल कर रहे हैं।

यह महज कोई गतिविधि नहीं, बल्कि चीन के न्यू एरा लेबर एजुकेशन (श्रम शिक्षा) का हिस्सा है। चीन अब अपने शिक्षा मॉडल में श्रम को एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ा रहा है, ताकि बच्चों को कम उम्र में ही मेहनत का मोल समझ आ सके।

खेती से हो रही विज्ञान की पढ़ाई

चीन के स्कूलों में बच्चों को ए फॉर एपल रटने के बजाय व्यावहारिक शिक्षा दी जा रही है। स्कूलों में बच्चों के लिए विशेष जमीन छोड़ी जाती है, जहां वे मौसम के अनुसार सब्जियां उगाते हैं।

किताबी ज्ञान के बजाय, बच्चे यहाँ सीधे प्रकृति से जुड़कर प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) जैसे विज्ञान के कठिन सिद्धांतों को समझ रहे हैं। अपनी उगाई गई मूली या गोभी को खुद काटने से बच्चों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होता है।

क्यों अनिवार्य है श्रम शिक्षा ?

साल 2022 में चीनी शिक्षा मंत्रालय ने प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के लिए श्रम शिक्षा को अनिवार्य कर दिया था। सरकार का स्पष्ट मानना है कि आधुनिक गैजेट्स के दौर में बच्चे शारीरिक मेहनत से दूर होते जा रहे हैं।

बागवानी बच्चों में धैर्य पैदा करती है। एक पौधे को फल देने में वक्त लगता है, जिससे बच्चे इंतजार करना और जिम्मेदारी उठाना सीखते हैं। उन्हें पता होता है कि अगर वे पानी नहीं देंगे, तो उनका प्यारा पौधा मुरझा जाएगा।

कुकिंग और सिलाई: आत्मनिर्भरता की पाठशाला

गार्डनिंग के अलावा, इन स्कूलों में बच्चों को खाना पकाना और सिलाई जैसी बुनियादी स्किल्स भी सिखाई जाती हैं। बच्चे खुद बगीचे से सब्जियां तोड़ते हैं, उन्हें धोते हैं और स्कूल के ओपन किचन में अपने दोस्तों के लिए खाना तैयार करते हैं।

यह शिक्षा प्रणाली बच्चों को जेंडर-न्यूट्रल भी बना रही है। यहां लड़के और लड़कियां दोनों ही अपनी लाइफ स्किल्स पर बराबर काम करते हैं। इससे उनमें टीम वर्क की भावना विकसित होती है।

डिजिटल युग में ग्रीन डोज

विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी में खेलने से न केवल बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, बल्कि यह उन्हें स्क्रीन एडिक्शन से भी दूर रखता है। ताजी हवा और धूप के बीच काम करना उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए ग्रीन डोज का काम करता है।

चीन का यह अनोखा मॉडल उन देशों के लिए एक सीख है, जो अपने बच्चों को केवल किताबी दुनिया में सीमित रखते हैं। यह मिट्टी से जुड़ाव आने वाली पीढ़ी को अधिक आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बना रहा है।

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