अंग्रेजी भाषा पर क्यों चिढ़े? ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा के बीच पाकिस्तान का अजीबोगरीब बयान, इंटरनेट पर उड़ा मजाक
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भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो चुका है। इस ऐतिहासिक सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ (7 मई, 2026) पर भारतीय अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। लेकिन, इस ब्रीफिंग के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है।

अंग्रेजी भाषा पर पाकिस्तान का विचित्र सवाल भारतीय अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक आनन-फानन में बैठक बुलाई, जिसे मरका-ए-हक नाम दिया गया। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक पहलुओं पर बात करने के बजाय भारतीय अधिकारियों की भाषा पर सवाल उठा दिया।

पाकिस्तानी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, भारतीय डीजीएमओ और वरिष्ठ अधिकारी प्रेस ब्रीफिंग में अंग्रेजी में क्यों बोल रहे थे? क्या वे इसलिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि वे दुनिया को बता सकें कि क्या हुआ था?

मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश? पाकिस्तान का यह बयान सैन्य जगत और आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने पाकिस्तानी सेना की कड़ी आलोचना की है। लोगों का कहना है कि जहां भारत ने अपनी सुरक्षा चिंताओं और सफल ऑपरेशन पर दुनिया के सामने स्पष्ट रुख रखा, वहीं पाकिस्तान मुख्य मुद्दे को दरकिनार कर केवल भाषा पर आपत्ति जता रहा है।

सोशल मीडिया पर हुई खिंचाई इंटरनेट पर पाकिस्तानी सेना को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, पाकिस्तानी अधिकारी इस बात से परेशान हैं कि भारत ने अंग्रेजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की। वे ऑपरेशन की गंभीरता पर बात करने के बजाय भाषाई विवाद छेड़ रहे हैं, जो उनकी घबराहट और बौखलाहट को दर्शाता है।

एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, यह देश की कैसी मानसिकता है? पाकिस्तानी सेना इसलिए रो रही है क्योंकि भारतीय अधिकारियों ने वैश्विक स्तर पर संवाद के लिए अंग्रेजी का चयन किया। इससे साफ जाहिर है कि पाकिस्तान के पास सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कहने के लिए कुछ ठोस नहीं बचा है।

ऑपरेशन सिंदूर का संदेश ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने एक बार फिर अपना सख्त रुख दोहराया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय डीजीएमओ और एयर मार्शल द्वारा दी गई यह ब्रीफिंग परमाणु ब्लैकमेल की धमकियों को बेअसर करने और क्षेत्र में भारत की आक्रामक सुरक्षा नीति को स्पष्ट करने के लिए थी। पाकिस्तान की ओर से भाषा पर की गई यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी असहजता को उजागर करने के लिए काफी है।

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