पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब असली परीक्षा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे शुभेंदु अधिकारी के सामने राज्य का शासन चलाने के लिए चुनौतियों की एक लंबी फेहरिस्त है। जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है, लेकिन अब वादों को जमीन पर उतारने की असली अग्निपरीक्षा शुरू हो गई है।
आंकड़ों की बात करें तो बंगाल की बेरोजगारी दर 3.6% है, जो राष्ट्रीय औसत (4.8%) से काफी बेहतर है। लेकिन यह केवल एक हिस्सा है। राज्य के युवाओं के बीच रोजगार की गुणवत्ता एक बड़ा मुद्दा है। शिक्षा के बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन जारी है, जिसे रोकना शुभेंदु सरकार के लिए पहली प्राथमिकता होगी।
साक्षरता दर 80-82% तक पहुंचना एक उपलब्धि है, लेकिन ग्रामीण-शहरी शिक्षा में गहरी खाई बनी हुई है। वहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था सबसे चिंताजनक है। राज्य की रुग्णता दर (Morbidity Rate) 24.5% तक है। डेंगू, स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जिन्हें दुरुस्त करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
भाजपा ने औद्योगिक पुनरुद्धार और सिंडिकेट राज खत्म करने का वादा किया था। बंगाल में जमीन अधिग्रहण की जटिलताएं और सिंगूर-नंदीग्राम जैसी पुरानी यादें निवेश में सबसे बड़ी बाधा रही हैं। क्या नई सरकार सिंगल विंडो क्लियरेंस और इंडस्ट्रियल पार्क्स के जरिए निवेशकों का भरोसा जीत पाएगी? यह भाजपा के आर्थिक विजन का सबसे बड़ा टेस्ट होगा।
बंगाल की छवि हमेशा से राजनीतिक हिंसा और झड़पों के कारण धूमिल रही है। शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी एक भयमुक्त माहौल तैयार करने की है। राज्य में विपक्षी दलों के साथ शांतिपूर्ण तालमेल बनाना और राजनीतिक हिंसा के चक्र को तोड़ना राज्य की साख के लिए अनिवार्य है।
सरकार के सामने खाली खजाना और सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) जैसे बड़े वित्तीय मुद्दे हैं। इसके साथ ही आयुष्मान भारत जैसी केंद्रीय योजनाओं को लागू करना और नौकरशाही को डेवलपमेंट मोड में लाना शुभेंदु सरकार के लिए कठिन होगा।
15 साल पहले जब ममता बनर्जी सत्ता में आई थीं, तब राज्य कर्ज और औद्योगिक पतन जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। आज स्थिति बदली है, लेकिन जनता की अपेक्षाएं कहीं ज्यादा हैं। शुभेंदु सरकार के लिए यह महज सत्ता का हस्तांतरण नहीं, बल्कि जनता की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने की एक कठिन दौड़ है। अब देखना यह है कि भाजपा अपने परिवर्तन के वादे को किस हद तक धरातल पर उतार पाती है।
Bengal has the 5th lowest unemployment rate (3.6%) in India, well below the national average of 4.8%, as per the Periodic Labour Force Survey for Oct-Dec 2025 released by the Union Government.
— The West Bengal Index (@TheBengalIndex) February 12, 2026
Only Gujarat (2.3%), Karnataka (2.7%), Jharkhand & Madhya Pradesh (3.2%) fared better. pic.twitter.com/ljfuC5mj27
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