वंदे मातरम् पर छिड़ा सियासी संग्राम: ओवैसी के बयान पर भड़की भाजपा, कहा- बौद्धिक रूप से बेईमान हैं आप
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नई दिल्ली: वंदे मातरम् को लेकर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने देश में नई बहस छेड़ दी है। ओवैसी द्वारा इसे महज देवी की स्तुति बताने पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है।

ओवैसी का विवादित तर्क हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि यह किसी धर्म का उत्सव नहीं हो सकता और देश किसी देवी-देवता के नाम पर नहीं चलता। उन्होंने इसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को लेकर भी विवादित टिप्पणी की और आरोप लगाया कि उनका दृष्टिकोण मुसलमानों के प्रति नकारात्मक था।

भाजपा का पलटवार भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने ओवैसी के बयान को बौद्धिक रूप से बेईमान और हास्यास्पद करार दिया है। चुग ने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध कर रहे हैं, वे देश की भावना से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि इसे गाना या इसका सम्मान करना सिर्फ सरकारी आदेश नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के मन की आवाज है।

स्वतंत्रता संग्राम का गौरव तरुण चुग ने आगे कहा कि वंदे मातरम् पिछले 150 वर्षों से भारतीय क्रांतिकारियों का उद्घोष रहा है। भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे गाते हुए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा था। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि अंग्रेजों के खिलाफ भारत के संघर्ष का मंत्र था। इसका अपमान करना उन वीरों की शहादत का अपमान है।

संविधान बनाम आस्था की दलील ओवैसी ने अपने तर्क में संविधान का सहारा लेते हुए कहा कि भारत की प्रस्तावना हम भारत के लोग से शुरू होती है, भारत माता से नहीं। उन्होंने दावा किया कि संविधान सभा ने भी देवी के नाम पर प्रस्तावना शुरू करने के सुझावों को खारिज कर दिया था।

विवाद का केंद्र यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। एक तरफ भाजपा इसे राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में देख रही है, तो दूसरी तरफ ओवैसी इसे धर्मनिरपेक्षता के चश्मे से तौल रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर भारत में राष्ट्रवाद और धार्मिक पहचान की परिभाषा पर सियासी पारा चढ़ा दिया है।

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