हंता वायरस का खौफ: क्या भारत में मचने वाली है महामारी? विशेषज्ञों ने दिया जवाब
News Image

दुनिया भर में स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं अक्सर सोशल मीडिया पर दहशत का माहौल बना देती हैं। हाल ही में एक क्रूज शिप पर हंता वायरस के संक्रमण की खबर सामने आने के बाद इसे नई महामारी के रूप में देखा जाने लगा। जहाज पर सवार 149 यात्रियों में दो भारतीय चालक दल के सदस्य भी शामिल थे। हालांकि, भारत के शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि देश को किसी भी तरह के खतरे की आशंका नहीं है।

आईसीएमआर (ICMR) का क्या कहना है?

पुणे स्थित ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने साफ किया है कि क्रूज पर संक्रमित पाए गए भारतीय नागरिक पूरी तरह से अलग मामला है। इसे भारत में वायरस का प्रसार नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस फिलहाल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कोई बड़ा जोखिम नहीं है।

कैसे फैलता है यह वायरस?

हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों के मलमूत्र, लार या उनके काटने से फैलता है। जब किसी बंद स्थान जैसे गोदाम या जहाज में चूहों की गंदगी के कण हवा में मिलते हैं, तो सांस के जरिए यह इंसानी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस के विपरीत, हंता वायरस का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलाव लगभग असंभव है।

भारत की तैयारी और टेस्टिंग क्षमता

भारत किसी भी वायरस से निपटने के लिए अब बेहतर स्थिति में है। देश भर में 165 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क मौजूद है, जहां आरटी-पीसीआर सुविधा के जरिए संदिग्ध मामलों की तुरंत पुष्टि की जा सकती है। यह डायग्नोस्टिक ताकत किसी भी खतरे को शुरुआती स्तर पर ही रोकने में सक्षम है। प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है।

एम्स विशेषज्ञों की राय

एम्स दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. पुनीत मिश्रा ने भी लोगों को आश्वस्त किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हंता वायरस कोई नई बीमारी नहीं है और यह कोरोना से पूरी तरह अलग है। कोरोना हवा के जरिए तेजी से फैलता था, जबकि हंता वायरस से बचने के लिए केवल चूहों से दूरी और साफ-सफाई रखना ही काफी है।

लक्षणों को पहचानें

हंता वायरस के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, थकान, मतली, उल्टी और पेट दर्द शामिल हैं। इसके अलावा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द भी हो सकता है। वायरस के प्रकार के आधार पर यह फेफड़ों या किडनी को प्रभावित कर सकता है। समय रहते पहचान और सही इलाज से स्थिति को आसानी से संभाला जा सकता है। वर्तमान में, आम जनता के लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

बंगाल में सोनार बांग्ला का उदय: शपथ ग्रहण से पहले सुवेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान

Story 1

टीम इंडिया का स्पिन गुरु बनने को तैयार साईराज बहुतुले: गंभीर ने क्यों चुनी है ये सादगी भरी पसंद?

Story 1

16,500 फीट की ऊंचाई पर मौत से जंग: अजनबी बना फरिश्ता, ऐसे बचाई मासूम की जान

Story 1

98 साल के माखनलाल सरकार: वो बुजुर्ग कार्यकर्ता जिनके पैर छूकर पीएम मोदी ने जीता सबका दिल

Story 1

शुभेंदु का राज्य-अभिषेक : योगी के भगवा गमछे ने बंगाल की राजनीति में फूंकी नई जान!

Story 1

KKR की दहाड़ से बदला प्लेऑफ का समीकरण, दिल्ली लगभग बाहर; जानिए अंक तालिका का ताजा हाल

Story 1

पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक बदलाव: शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण में PM मोदी का दंडवत प्रणाम चर्चा में

Story 1

अंडमान की हसीन वादियों में घुलेंगे प्यार के रंग: IRCTC लाया खास रोमांटिक पैकेज

Story 1

विजय की राह में कानूनी कांटे: शपथ ग्रहण से पहले समर्थन पत्र पर घमासान

Story 1

पश्चिम बंगाल का नया अध्याय: सुवेंदु अधिकारी होंगे राज्य के अगले मुख्यमंत्री, कल लेंगे शपथ