शुवेंदु अधिकारी का बड़ा धर्मसंकट: नंदीग्राम या भवानीपुर, किसे चुनेंगे भाजपा के जायंट किलर ?
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कोलकाता। बंगाल चुनाव 2026 में जीत हासिल करने के बाद भाजपा नेता शुवेंदु अधिकारी एक बड़े राजनीतिक धर्मसंकट में घिरे हैं। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से जीत दर्ज की है, लेकिन कानूनन उन्हें एक सीट छोड़नी होगी।

कानूनी बाध्यता और समय सीमा भारतीय संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत कोई भी व्यक्ति दो सीटों से चुनाव तो लड़ सकता है, लेकिन दो निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।

नियमों के अनुसार, शुवेंदु को चुनाव परिणाम घोषित होने के 14 दिनों के भीतर किसी एक सीट से इस्तीफा देना अनिवार्य है। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो उनकी दोनों सीटें रिक्त घोषित की जा सकती हैं।

नंदीग्राम: शुवेंदु का अभेद्य किला राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुवेंदु नंदीग्राम सीट को अपने पास रखेंगे। नंदीग्राम वही भूमि है जिसने उन्हें जायंट किलर की पहचान दी है। 2021 के बाद 2026 में भी इस सीट से जीत ने साबित कर दिया है कि यह उनका गढ़ है।

शुवेंदु ने अपने समर्थकों से भी स्पष्ट कहा है कि, नंदीग्राम ने मुझे पहचान दी है और मैं इसे कभी नहीं छोड़ सकता। आज वह व्यक्तिगत रूप से नंदीग्राम के गांवों में जाकर जनता का आभार भी जता रहे हैं।

भवानीपुर छोड़ने के पीछे की रणनीति भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का पारंपरिक क्षेत्र है। यहाँ जीत भाजपा के लिए एक प्रतीकात्मक विजय रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुवेंदु भवानीपुर से इस्तीफा देकर उपचुनाव की स्थिति पैदा करेंगे।

भाजपा की रणनीति भवानीपुर में किसी नए युवा चेहरे या कद्दावर नेता को उतारकर शहरी कोलकाता में अपनी पकड़ मजबूत करने की हो सकती है। शुवेंदु की राजनीति का मुख्य केंद्र वैसे भी ग्रामीण बंगाल और मेदिनीपुर रहा है।

अगला कदम: शपथ ग्रहण की तैयारी संभावना है कि 8 मई को विधायक दल की बैठक के आसपास शुवेंदु भवानीपुर सीट से अपना इस्तीफा विधानसभा सचिव को सौंप देंगे। इसके बाद वह केवल नंदीग्राम के विधायक के रूप में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

भवानीपुर सीट खाली होने पर प्रियंका टिबरेवाल या किसी अन्य बड़े चेहरे को मौका देने की सुगबुगाहट तेज है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद अधिकारी अपनी कर्मभूमि नंदीग्राम के विकास के लिए कौन से ठोस कदम उठाते हैं।

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