स्वर्ग जैसा बाली अब बन चुका है कूड़े का आइलैंड , कचरे के अंबार से दम घुट रही है पर्यटकों की पसंद
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इंडोनेशिया का बाली अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत समुद्र तटों के लिए दुनिया भर में मशहूर था। लेकिन आज यही बाली कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। सड़कों पर लगा कूड़े का अंबार न केवल बदबू फैला रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है।

चूहों का डेरा और जहरीला धुंआ बाली की गलियों में जमा कचरे के कारण चूहों की भरमार हो गई है। परेशान स्थानीय लोग कचरे में आग लगा रहे हैं, जिससे उठने वाला जहरीला धुंआ लोगों को बीमार कर रहा है। कचरे की भयावह स्थिति को देखते हुए अब पर्यटक भी यहां आने से कतराने लगे हैं।

दुकानदारों की बढ़ती मुसीबत स्थानीय व्यवसायी इस संकट की मार झेल रहे हैं। 34 वर्षीय दुकानदार युविता बताती हैं कि कचरे की बदबू इतनी है कि ग्राहक बिना सामान खरीदे वापस चले जाते हैं। उन्होंने अपनी दुकान के पास की सफाई के लिए निजी खर्च पर सफाई कर्मचारी रखे हैं, फिर भी हर दिन भारी मात्रा में कचरा जमा हो रहा है।

बाली में हर दिन 3,400 टन कचरा बाली में स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां हर दिन करीब 3,400 टन कचरा निकलता है। मशहूर कूटा बीच के पार्किंग लॉट अक्सर कमर तक ऊंचे कचरे के बैगों से भरे रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया से आए पर्यटक जस्टिन बुचर का कहना है कि यह नजारा बिल्कुल भी सुखद नहीं है।

क्यों बिगड़े हालात? बाली में कूड़ा बढ़ने की एक बड़ी वजह पर्यटन का दबाव है। पिछले साल यहां 44 लाख की आबादी के मुकाबले 70 लाख पर्यटक पहुंचे थे। स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रशासन ने बाली की सबसे बड़ी लैंडफिल साइट को बंद कर दिया। अब सफाई कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि वे कचरा इकट्ठा तो करें, लेकिन उसे फेंकें कहां?

प्रशासन की बड़ी कार्रवाई की तैयारी सरकार अब सख्त तेवर अपना रही है। जो लोग खुले में कचरा फेंकते या जलाते हुए पकड़े जाएंगे, उन्हें तीन महीने की जेल और 5 करोड़ रुपिया तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार ने अगस्त से देश की सभी ओपन लैंडफिल साइट को बंद करने का वादा किया है।

विशेषज्ञों की चेतावनी वेस्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट नूर अजीजा के अनुसार, लैंडफिल में जमा ऑर्गनिक कचरे से मीथेन गैस बन रही है, जिससे धमाकों और जमीन खिसकने का गंभीर खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एकमात्र समाधान कंपोस्टिंग और कचरा प्रबंधन को लेकर एक बड़ा जन-अभियान चलाना है, क्योंकि इंडोनेशिया हर साल 4 करोड़ टन कचरा पैदा करता है, जिसका मात्र एक-तिहाई हिस्सा ही रिसाइकल हो पाता है।

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