बंगाल चुनाव के बाद बांग्लादेश को तीस्ता समझौते की उम्मीद, PM मोदी से अब क्या है नई मांग?
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल भारत की राजनीति को बदल दिया है, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी नई उम्मीदें जगा दी हैं। बीजेपी की जीत पर ढाका की मुख्य विपक्षी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने न केवल खुशी जताई है, बल्कि वर्षों से अटके तीस्ता जल-बंटवारा समझौते को लेकर भी बड़ा दांव खेला है।

सत्ता परिवर्तन से तीस्ता पर नई उम्मीद

BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत ढाका और कोलकाता के बीच संबंधों में एक नया अध्याय खोल सकती है। बांग्लादेश लंबे समय से यह मानता रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तीस्ता विवाद को सुलझाने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थीं। अब नई सरकार से उन्हें इस मुद्दे पर सार्थक पहल की उम्मीद है।

सुवेंदु अधिकारी की तारीफ और रास्ते का कांटा

BNP ने सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की है। हेलाल ने दावा किया कि ममता सरकार के रुख के कारण ही 2011 का प्रस्तावित समझौता ठंडे बस्ते में चला गया था। उन्होंने कहा कि बीजेपी की नई सरकार अब केंद्र की नीतियों के साथ तालमेल बिठाते हुए इस विवाद का समाधान ढूंढ सकती है। हालांकि उन्होंने सीधे पीएम मोदी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर केंद्र सरकार की ओर था।

1983 से क्यों अटका है मामला?

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी का जल बंटवारा दशकों से एक गंभीर मुद्दा रहा है। 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया था, लेकिन वह कभी पूरी तरह लागू नहीं हो सका। इसके बाद 2011 में मनमोहन सिंह सरकार के दौरान एक और समझौता प्रस्तावित था, जिसे बंगाल सरकार के कड़े विरोध के चलते रोक दिया गया था।

क्यों महत्वपूर्ण है तीस्ता?

बांग्लादेश का आरोप है कि गर्मी और सूखे के समय भारत द्वारा पानी रोके जाने से उनके निचले इलाकों में खेती और जनजीवन प्रभावित होता है। दोनों देशों के बीच 54 साझा नदियां हैं, लेकिन अब तक केवल गंगा जल संधि और कुशियारा नदी समझौता ही सफलतापूर्वक लागू हो पाया है। तीस्ता की कमी बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए एक बड़ा संकट बनी हुई है।

वैचारिक मतभेद छोड़ साथ आने की पहल

BNP और बीजेपी की विचारधाराएं भले ही अलग हों, लेकिन अजीजुल बारी हेलाल का कहना है कि राष्ट्रीय हित हर चीज से ऊपर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीस्ता जैसे मुद्दों पर दोनों देश एकजुट हो सकते हैं। पड़ोसी देश की यह सक्रियता बताती है कि नई दिल्ली में बैठी सरकार और पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक स्थिति का लाभ उठाकर ढाका अब अपने पुराने लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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