नो-हैंडशेक विवाद पर सलमान अली आगा का बड़ा खुलासा, बताया क्यों टीम इंडिया ने नहीं मिलाया था हाथ
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टॉस से पहले ही मिली थी चेतावनी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट के मैदान पर अक्सर तनाव देखने को मिलता है। हाल ही में एशिया कप 2025 और टी20 विश्व कप 2026 के दौरान नो-हैंडशेक विवाद ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। अब पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और पूरी सच्चाई सामने रखी है।

मैच रेफरी ने पहले ही किया था आगाह एक पॉडकास्ट के दौरान सलमान अली आगा ने खुलासा किया कि टॉस से पहले ही मैच रेफरी ने उन्हें स्पष्ट कर दिया था कि टीम इंडिया हैंडशेक नहीं करेगी। आगा ने कहा, रेफरी ने मुझे पहले ही बता दिया था कि आप हैंडशेक का इंतजार न करें, भारतीय टीम ऐसा नहीं करेगी। इसलिए मैं पहले से मानसिक रूप से तैयार था।

खराब प्रदर्शन छिपाने का जरिया? आगा के इस खुलासे से साफ है कि पाकिस्तान की टीम और मैनेजमेंट को पहले से ही भारत के रुख का अंदाजा था। इसके बावजूद, पाकिस्तान ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी टीम ने अपने खराब प्रदर्शन और हार को छिपाने के लिए इस नो-हैंडशेक विवाद को बेवजह तूल दिया।

ड्रेसिंग रूम तक पहुंची थी पाकिस्तानी टीम विवाद यही नहीं थमा। मैच खत्म होने के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम तक पहुंच गए थे ताकि हैंडशेक की औपचारिकता पूरी की जा सके। इसे खेल भावना के बजाय एक सोची-समझी ड्रामेबाजी के तौर पर देखा गया, जिसे भारत ने पूरी तरह नजरअंदाज किया।

विवाद की जड़: पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर इस तनाव के पीछे की असली वजह सीमा पार से फैलाई गई नफरत थी। एशिया कप से ठीक पहले पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले ने भारत को झकझोर दिया था। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया और पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।

टीम इंडिया का सख्त स्टैंड पहलगाम हमले के बाद देश में पाकिस्तान के साथ मैच खेलने को लेकर भारी विरोध था। बावजूद इसके, भारत ने मैदान पर उतरने का फैसला किया, लेकिन अपना विरोध जताने के लिए हैंडशेक नहीं करने का सख्त स्टैंड लिया। यह नीति न केवल सीनियर पुरुष टीम ने, बल्कि भारतीय महिला और अंडर-19 टीमों ने भी अपनाई।

सलमान अली आगा ने अब माना है कि खेल में हैंडशेक न होना एक गलत संदेश देता है, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत ने यह फैसला अपनी सुरक्षा और राष्ट्र की अस्मिता के लिए लिया था।

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