हम भारत जैसे नहीं : पाकिस्तानी मंत्री ने लाइव टीवी पर कबूली अपनी सबसे बड़ी कमजोरी, दुनिया के सामने हुई फजीहत
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पाकिस्तान इन दिनों भीषण ईंधन संकट से जूझ रहा है। एक तरफ पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतें हैं, तो दूसरी तरफ सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। इस बीच, पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने देश की बदहाली का सच स्वीकार कर लिया है।

भारत से की तुलना, खुद को बताया लाचार एक टीवी इंटरव्यू के दौरान जब पत्रकार ने पाकिस्तान के तेल भंडार (स्ट्रेटेजिक रिजर्व) को लेकर तीखे सवाल पूछे, तो मंत्री अली परवेज मलिक रक्षात्मक मुद्रा में आ गए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, हम भारत जैसे नहीं हैं। भारत के पास 60 से 70 दिन का तेल भंडार है, जिसे वे एक सिग्नेचर के साथ रिलीज कर सकते हैं। हमारे पास रणनीतिक भंडार (Strategic Reserve) के नाम पर कुछ भी नहीं है।

5-7 दिन का तेल, और वो भी पूरी तरह असुरक्षित मंत्री ने खुलासा किया कि पाकिस्तान के पास मुश्किल से 5 से 7 दिन का कच्चा तेल होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि किसी भी बड़े वैश्विक संकट या सप्लाई चेन में रुकावट आने पर पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ सकती है। मंत्री के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि देश इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहा है।

IMF की शर्तों और आर्थिक बदहाली में फंसा पाक इंटरव्यू में मंत्री ने माना कि भारत की स्थिति मजबूत होने का सबसे बड़ा कारण उसकी आर्थिक स्थिरता है। पाकिस्तान इस समय IMF के प्रोग्राम में फंसा हुआ है, जिसकी कड़ी शर्तों के कारण सरकार को जनता पर पेट्रोल-डीजल के जरिए भारी टैक्स का बोझ डालना पड़ रहा है। यही कारण है कि वहां की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर है।

जनता का गुस्सा और सरकार की लीपापोती देश में पेट्रोल की कीमतें 485 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं, जिससे हालात बेकाबू हो गए। जनता के बढ़ते उबाल को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आनन-फानन में कीमतों में 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल गुस्से को शांत करने के लिए एक दिखावा है, क्योंकि देश के पास तेल खरीदने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार ही नहीं है।

आगे क्या होगा? पाकिस्तान की यह खुली किताब जैसी स्वीकारोक्ति बताती है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से बाहरी सप्लाई और कर्ज पर टिकी है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ीं या सप्लाई में थोड़ी भी और बाधा आई, तो पाकिस्तान में न केवल महंगाई का बम फटेगा, बल्कि आर्थिक अराजकता का खतरा भी बढ़ सकता है।

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