जबलपुर नाव हादसा: डूबती नाव में जैकेट बांटने वाला सिस्टम कटघरे में
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मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी में हुआ नाव हादसा महज एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक लापरवाही की कलंक कथा है। बरगी बांध के पास हुई इस त्रासदी में अब तक नौ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अभी भी लापता हैं।

डूबती नाव और देर से मिली जिंदगी हादसे का एक भयावह वीडियो सामने आया है, जो सिस्टम की पोल खोल रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि जब नाव डूबने लगी, तब यात्रियों को लाइफ जैकेट बांटी जा रही थीं। सवाल यह है कि सुरक्षा उपकरण पहले से क्यों नहीं पहनाए गए? क्या नाव में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे? हताशा में जैकेट बांटने की यह कवायद किसी मजाक से कम नहीं थी।

प्रशासन की विफलता पर जनता का गुस्सा सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद देश भर में आक्रोश है। चश्मदीदों के मुताबिक, अचानक बिगड़े मौसम और तेज हवाओं के बीच नाव असंतुलित होकर पलट गई। लोग अपने बच्चों को सीने से लगाकर मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम नदारद थे। पीड़ित परिवार अब सिस्टम से तीखे सवाल पूछ रहे हैं।

क्या सुरक्षा नियमों का हुआ पालन? प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो नाव में सवार यात्रियों की संख्या तय सीमा से अधिक थी। यदि सुरक्षा नियमों का पालन हुआ होता, तो इतने लोगों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। अंधेरा और बढ़ता जलस्तर बचाव कार्य में बाधा बना रहा है, जिससे बचाव दल को शव निकालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। अब तक 28 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन छह लोग अब भी लापता हैं।

सिस्टम की उदासीनता का पुराना इतिहास यह पहली बार नहीं है जब लापरवाह सिस्टम ने किसी का संसार उजाड़ा है। जनवरी 2026 में ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत भी ऐसी ही प्रशासनिक सुस्ती का नतीजा थी। वहां भी गड्ढे में गिरने के बाद 90 मिनट तक रेस्क्यू में देरी हुई थी। जबलपुर का यह हादसा उसी चेतावनी को दोहरा रहा है—क्या हम हादसों से सबक लेने के बजाय सिर्फ मौतों का आंकड़ा देखना जारी रखेंगे?

जिम्मेदारी किसकी? हादसे के बाद अब हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है: इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या मौतों के बाद मिलने वाला मुआवजा जान की कीमत चुका सकता है? प्रशासन की चुप्पी और बचाव कार्यों में देरी ने उन परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है, जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया है। यह समय केवल दुख जताने का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है।

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